7th December 2018 32

खाकी की निगहबानी में अस्पताल में कैद आमरण अनशनकारी


इंटरआर्क कंपनी के बाहर पिछले दस दिन से आमरण अनशन पर थे श्रमिक

अनशनकारी श्रमिकों को जबरन उठा कर पहुंचाया गया अस्पताल

वार्डों और अस्पताल के बाहर तैनात किया पीएसी और पुलिस बल

रुद्रपुर। सालाना वेतन वृद्घि की मांग को लेकर धरने पर डटे इंटरआर्क कंपनी के श्रमिकों का धरना आमरण अनशन में बदल गया और इस अनशन को खत्म करने के लिए आज सुबह ही पुलिस प्रशासन इंटरआर्क गेट पर जा पहुंचा। श्रमिक सो रहे थे और सोते श्रमिकों को पुलिस ने जबरन एंबुलेंस में डाल कर अस्पताल पहुंचा दिया। सुरक्षा के लिहाज से जिला अस्पताल के वार्ड और अस्पताल में भारी फोर्स तैनात कर दिया गया है। कुल मिलाकर श्रमिकों को खाकी की निगहबानी में अस्पताल में कैद कर दिया गया है। 

पुलिस जिन्हें उठा कर अस्पताल लाई उनमें फिटर विजय पांडे पुत्र भुवन चंद्र पांडे, गाइडर मैन सुशील पांडे की पत्नी अखिलेश देवी, मशीन ऑपरेटर अनिल कुमार की पत्नी निहारिका सिंह, सीनियर फिटर विनय कुमार पुत्र यशपाल सिंह, ड्रिल मैन अजीत कुमार पुत्र उमेश मंडल व किच्छा संगठन के महामंत्री पान मोहम्मद की पत्नी जरीना बेगम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन्हें चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है। कारण बताया कि लगातार भूखे रहने की वजह से अनशनकारियों का स्वास्थ्य खराब हो रहा था। जबकि अस्पताल में भर्ती लोगों का कहना है कि उन्हें जबरन ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। उनका स्वास्थ्य बिलकुल ठीक है। आरोप है कि पुलिस प्रशासन यह सब कंपनी प्रबंधन के इशारे पर कर रहा है। ताकि श्रमिकों का अनशन खत्म कराया जा सके। 

पुलिस की कार्रवाई पर इंटरआर्क का मिंडा को समर्थन

दोनों की कंपनी कर्मचारियों पर पुलिसिया एक्शन के बाद इंटरआर्क श्रमिकों ने कंपनी गेट के बाहर सभा का आयोजन किया। जहां अपनी बात रखते हुए इंटरआर्क मजदूर संगठन के कोषाध्यक्ष विरेंद्र पटेल ने कहा कि जिस तरह पुलिस प्रशासन मजदूरों का दमन कर रही है, यदि इसी तरह मालिक और प्रबंधकों के खिलाफ एक प्रतिशत भी कार्रवाई करती तो इस तरह की नौबत ही नहीं आती। स्पार्क मिंडा के श्रमिकों पर की गई कार्रवाई की घोर निंदा करते हुए उन्होंने मिंडा श्रमिकों को समर्थन देने का एलान किया। वहीं संगठन के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने कहा कि आज होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता होने वाली है। इसके प्रबंधन और प्रशासन अपने ऊपर से दबाव कम करने के लिए यह कार्रवाई कराई गई है। इस दौरान लक्ष्मण सिंह, विरेंद्र पटेल, दलजीत सिंह, विनय, रमेश, रामेश्वर, राहुल, संगीता, सुशीला, सुनीता, रोशनी, सीता, सोनी, आशा, मनोरमा, मोनिका, प्रभा आदि थे। 

छह को उठाया सात और श्रमिक अनशन पर बैठ गए

खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने आमरण अनशन पर बैठे अनशनकारियों का पुलिस ने जबरन उठा लिया, लेकिन इसके बाद सात और श्रमिक अनशन पर बैठ गए। जानकारी देते हुए महामंत्री सौरभ पटेल ने बताया कि पुलिस प्रशासन लाख कोशिशें कर ले, लेकिन हमारा आमरण अनशन जारी रहेगा। छह साथियों को जबरन उठाने के बाद हमारे सात साथी आशा सिंह, सुशीला देवी, सुनीता देवी, रंजीत पाल, उमेश मिश्रा, दीना नाथ शुक्ला, विरजू गिरि आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। वहीं लक्ष्मण सिंह ने कहा कि जब तक फैसला नहीं होता तब तक हमारा आंदोलन चलता रहेगा। आगे हमारा आंदोलन और उग्र होगा। इसी के तहत अब हम शासन प्रशासन का पुतला फूंक कर प्रबंधन को आगे होने वाले आंदोलनों का संदेश भी देंगे। 


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