26th September 2018 22

आधार पर सुप्रीम फैसला


बैंक और मोबाइल से आधार को लिंक करना जरूरी नहीं
कोर्ट ने आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को रखा बरकार
आधार एक्ट की धारा 57 को कोर्ट ने किया रद्द
नयी दिल्ली। आधार की वैधता पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड और पहचान पत्र में मौलिक अंतर है। एक बार अगर बायोमेट्रिक इंफार्मेशन स्टोर किया जाता है तो वह सिस्टम में बना रहता है। कोर्ट ने कहा कि आधार आज लोगों की पहचान बन चुका है। सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है, आधार का अर्थ अनूठा है।
आधार कार्ड के मामले में सुप्रीम कोर्ट का आज बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को बरकार रखा है। कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ आधार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई, एनईईटी और यूजीसी के लिए आधार जरूरी होगा, लेकिन स्कूल एडमिशन में ये जरूरी नहीं होगा। इसके अलावा आधार बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम के लिए भी जरूरी नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने पैन कार्ड के लिए आधार की अनिवार्यता को बरकरार रखा है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार बायॉमीट्रिक डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी। कोर्ट ने केंद्र को हिदायत भी दी है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद्द कर दिया है। अब प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
आधार पर फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा है कि आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। फैसला पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, लेकिन कुछ अलग भी होना चाहिए। जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार कार्ड ने गरीबों को पहचान और ताकत दी है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें डुप्लीकेसी की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड पर हमला करना लोगों के अधिकारों पर हमला करने के समान है।
जस्टिस सीकरी ने कहा है कि आधार नामांकन के लिए यूआइडीएआई द्वारा नागरिकों के न्यूनतम जनसांख्यिकीय (जनसंख्या संबंधी) और बॉयोमीट्रिक डेटा एकत्र किए जाते हैं। किसी व्यक्ति को दिया गया आधार संख्या अनन्य है और किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं जा सकता। जस्टिस एके सिकरी ने कहा कि आधार गरीबों को अधिकार देता है और उन्हें एक पहचान देता है, आधार अन्य आईडी प्रमाणों से भी अलग है क्योंकि इसे डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता है। डेटा सुरक्षा को लेकर जस्टिस सिकरी ने केंद्र से कहा कि जितनी जल्दी हो सके मजबूत डेटा संरक्षण कानून लागू करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक रूप से आधार वैध है, लेकिन इसे बैंकों और मोबाइल से लिंक करना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूलों में दाखिले के लिए आधार जरूरी नहीं है।


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