31st October 2017 95

सरकारी कामों में मिलेगी सफलता क्योंकि इस बार है राज पंचक


पंचक पांच दिनों तक होता है जो वर्ष में कई बार आता है। ज्योतिषाशास्त्रियों के अनुसार पंचक भी अलग अलग प्रकार के होते हैं। इसकी गणना चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर होती है। इस साल 4 सितंबर की रात 11 बजकर 55 मिनट से पंचक शुरू हो चुका है, जो 9 सितंबर तक रहेगा। सोमवार को शुरू होने की वजह से इसे राज पंचक कहा जा रहा है। यह पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है। इस दौरान शुभ काम करने पर वैसा काम पांच बार होगा।

इतनी तरह के होते हैं पंचक

शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। यह पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।

अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है।

मंगलवार को शुरू होने वाले पंचक को अग्नि पंचक कहते हैं और इस दौरान आग लगने का भय रहता है। मंगल के पंचक के दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक लेने वाले काम कर सकते हैं। शुक्रवार को शुरु होने वाले पंचक को चोर पंचक होता है। इस पंचक में यात्रा, लेन देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से धन हानि हो सकती है। इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।

क्या होता है पंचक में

कहते हैं कि पंचक में जो काम होता है, वह पांच बार होता है। अच्छे और शुभ काम को करने में तो कोई परेशानी नहीं है। मगर, अशुभ हो तो योग्य पंडित से सलाह जरूर लेनी चाहिए। पंचक के दौरान कुछ कामों को करने की मनाही होती है जिसे हमें भूल कर भी नहीं करनी चाहिए।

भूलकर भी नहीं करें ये काम

चारपाई नहीं बनवानी चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। पंचक के दौरान घनिष्ठा नक्षत्र में घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए। इससे आग लगने का भय रहता है। दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है। रेवती नक्षत्र चल रहा हो, तो उस समय घर की छत नहीं बनानी चाहिए। शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी पंडित की सलाह लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।


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