20th October 2018 166

अगले महीने रिलीज होगा पप्पू कार्की का अंतिम वीडियो गीत


पहाड़ के पुराने रीति रिवाजों पर फिल्माया गया है गीत

शीघ्र जारी होगा छम छमा बाजली हो का प्रोमो

छित्कू हिवाल प्रोडक्शन से गाया था कार्की ने अंतिम गीत

जीवन राज 

हल्द्वानी। छित्कू हिवाल प्रोडक्शन जौहार मुनस्यारी के डायरेक्टर व प्रोडूसर देबू पांगती ने बताया कि उत्तराखंड के अमर लोक गायक पप्पू कार्की द्वारा गाया गया अंतिम गीत छम छमा बाजली हो, छम घुघरू लगो बाज की वीडियो शूटिंग पूरी हो चुकी है। शूटिंग मुनस्यारी के अलावा कई अन्य जगहों पर शूट की गई है। जिसकाव वीडियो शीघ्र की दर्शकों के बीच होगा। 

बता दें कि उत्तराखंड के अमर लोक गायक पप्पू कार्की द्वारा गाया गया यह अंतिम गीत था। इस गीत की रिकॉडिंग नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई थी। इस गीत को देबू पांगती ने लिखा था और सुरों में संजोया था उत्तराखंड के अमर लोक गायक स्व.पप्पू कार्की ने, जिसके बाद दर्शकों ने इस गीत को खूब सराहा। इस गीत के रिलीज के कुछ दिनों बाद नौ जून 2018 को एक सड़क हादसे ने उत्तराखंड से एक सुपर स्टार लोकगायक को छिन लिया। इस गीत को अभी तक यू ट्यूब पर पांच लाख से ऊपर लोग देख चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस गीत की वीडियो शूटिंग पूरी हो चुकी है। इस गीत से जुड़े हर कलाकार को हमने फोकस करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि यह गीत ऐसा पहला गीत होगा जिसमें एक गांव के सभी लोगों ने प्रतिभाग किया है। इस गीत में हमने पहाड़ों में होने वाली पुरानी शादियों को दिखाया है जो उस दौर में अपनी वेशभूषा और परम्परा के साथ होती थी। साथ ही इस गीत में अलग अलग जिलों से जुड़े कलाकारों ने जौहार मुनस्यार के रीति रिवाजों में अपने को ढाला हैं। इस वीडियो गीत में शादी के पहले के पूरे रीति रिवाजों को फिल्माया गया है। जैसे शादी से पहले पहाड़ों में चावलों को बीना जाता है। जिसमें शादी में आने वाले लोगों को खाने पीने में कोई दिक्कत न हो। साथ ही दूल्हे द्वारा पहने जाना वाला कोट जो बहुत गर्म होता है। उस दौर में चलता था। उसको पर्दे पर लाकर दर्शकों को पुरानी यादें ताजा कराने की कोशिश की है। हमारी संस्कृति, रीति रिवाज, परम्परा जिन्दा रहे। कैसे हम उन्हें संवार सकें मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है। उन्होंने बताया कि यह गीत अगले महीने यानि नवम्बर के दूसरे सप्ताह में रिलीज कर दिया जाएगा। 

त्यौर दगडि़ मैं नाचुला म्यौर दगाड़ा तू ले नाच

हल्द्वानी। देबू पांगती ने अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि जब मैने पप्पू को ये गीत लिखकर दिया तो उसने पढ़ा और बोले देबू दा गीत में कुछ करक्शन कर लूं तो मैंने कहा कर ले भाई। आप इतने बड़े गायक हो, आपको सब हक है। तो पप्पू कार्की ने छम छमा बाजली हो, छम घुंघरू लगों बाज गीत में कनेक्शन करते हुुए त्यौर दगडि़ मैं नाचुला म्यौर दगाड़ा तू ले नाच इसके  बाद जोड़ दिया। जिसके बाद गाने में एक नई जान भर दी। इस गाने ने लोगों को थिरकने पर मजबूर करता है। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी गायक ने इस गाने के सारे अंतरे एक साथ  रिकॉर्ड कर दिए। पप्पू ने यह गाना एक ही बार में पूरा कर दिया। उसे देख में ताजुब खा गया कि जिस गाने को 15 से 20 दिन लग जाते है। उसे पप्पू कार्की ने एक साथ एक ही दिन में पूरा कर दिया।  


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