8th January 2017 620

सियासी प्रतिद्वंदता के कारण हरीश ने रोका विकास: सौरभ


सितारगंज के स्वीकृत प्रोजक्ट तक रोक दिए गए  ||  किसानों का गन्ना भुगतान भी नहीं किया

जनता चुनाव में देगी कांग्रेस को जवाब 

रुद्रपुर। सितारगंज विधानसभा से चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा का कहना है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सितारगंज विधानसभा क्षेत्र का विकास अपनी सियासी प्रतिद्वंदता पूरी करने के लिए रोक दिया। उनके पिता विजय बहुगुणा ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में जिन योजनाओं को मंजूरी दी, उनमें से कुछ प्रोजेक्ट रोक दिए गए और कुछ को निरस्त ही कर दिया गया। कहा कि विकास की बात करने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत को जनता इस चुनाव में जवाब देने को तैयार बैठी है। गोल्फ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके और हाल में ही ओएनजीसी के सीनियर मैनेजर की नौकरी छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले सौरभ बहुगुणा से वसुंधरा दीप ने बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश।

सवाल: सितारगंज से चुनाव कौन लड़ेगा? आप या आपके पिता विजय बहुगुणा?

जवाब: मैंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सितारगंज क्षेत्र से टिकट की दावेदारी की है। पार्टी जिसे भी टिकट देगी वही चुनाव लड़ेगा। वैसे विजय बहुगुणा पहले ही चुनाव न लडऩे का ऐलान कर चुके हैं।

सवाल: यदि आपको टिकट मिला तो चुनाव किन मुद्दों पर लड़ेंगे?

जवाब: वह चुनाव में विकास को ही मुख्य मुद्दा रखेंगे। वह चाहते हैं कि मुख्यमंत्री हरीश रावत के विकास के दावों की पोल खोली जाए। कहा कि जब उनके पिता विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने सितारगंज को विकास की मुख्य धारा से जोडऩे का कार्य किया था। सितारगंज के लिए 25 करोड़ की लागत से नर्सिंग कालेज स्वीकृत किया था। 54 करोड़ की लागत से बनने वाली सिरसा रोड स्वीकृत की थी। 56 करोड़ की लागत का सिंचाई प्रोजक्ट स्वीकृत किया। सितारगंज का बस अड्डा स्वीकृत किया गया। साथ ही स्वास्थ्य सेवा के लिए सौ बैड का अस्पताल बनाने की योजना थी, मगर जब विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री पद से हटे और हरीश रावत मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सबसे पहले सितारगंज के विकास की गति को थामने का कार्य किया। उक्त सारी योजनाएं रोक दी गई। बस स्टैंड का काम शुरू हो चुका था, लेकिन उसके विकास के लिए और धनराशि नहीं दी गई। कहा कि कब्रिस्तान की चाहरदीवारी करने का कार्य रोक दिया गया। यही नहीं सितारगंज के गन्ना किसानों को गन्ने का भुगतान तक रोक दिया गया। कहा कि किसानों का कसूर सिर्फ इतना था कि वह बहुगुणा के साथ हैं।

सवाल: विजय बहुगुणा ने इसका विरोध क्यों नहीं किया?

जवाब: बहुगुणा ने कांग्रेस का साथ इसीलिए छोड़ा, क्योंकि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी मनमानी कर रहे थे। उनके पिता पार्टी हाईकमान तक अपनी व्यथा लेकर गए, मगर वहां उनकी सुनी नहीं गई। अब वह चाहते हैं कि जनता की अदालत में इसका फैसला हो। 

सवाल: आपकी जीत का आधार क्या होगा? 

जवाब: हमने पार्टी के बल पर चुनाव नहीं लड़ा। 85 फीसदी कार्यकर्ता उनके परिवार से जुड़े हैं। जनता आज उनके साथ है। बड़ी संख्या में गांवों के प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य आज उनके साथ हैं, क्योंकि उनकी सोच विकास की है। उनका कहना है कि यूं तो उन्हें हर वर्ग का समर्थन है, लेकिन बंगाली एवं मुस्लिम वोट बहुतायत में उनके साथ हैं।

सवाल: चुनाव की तैयारी क्या है?

जवाब: हमने सितारगंज विधानसभा क्षेत्र को छह सेक्टरों में बांटा है। वह प्रतिदिन प्रत्येक सेक्टर में मीटिंग करते हैं। एक दर्जन से अधिक मीटिंग करके वह लोगों से सीधे संपर्क बनाए हुए हैं।

सवाल: यदि आप चुनाव लड़े तो मुकाबला किससे होगा?

जवाब: जाहिर है कि कांग्रेस से ही उनका मुकाबला होना है। प्रदेश में अभी अधिकांश सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही लड़ाई है, क्योंकि सपा व बसपा का यहां जनाधार इतना नहीं है कि वह मुख्य संघर्ष में शामिल हो सके।

सवाल: क्यों सितारगंज सीट से दो बार बसपा के टिकट पर नारायण पाल चुनाव जीते?

जवाब: उस वक्त सितारगंज सुरक्षित विधानसभा सीट थी। नारायण पाल धन बल के बूते चुनाव जीतते थे, क्योंकि उनके मुकाबले की कोई हस्ती चुनाव मैदान में नहीं होती थी। अब स्थितियां बदल गई हैं। नारायण पाल भी अब बसपा में नहीं हैं। 

सवाल: आप पर बाहरी प्रत्याशी होने का आरोप लगेगा तो?

जवाब: मेरा घर सितारगंज में है। वोट सितारगंज में है। एकाउंट सितारगंज में है। जो लोग टिकट के लिए धर्म जाति के समीकरण बिठा रहे हैं वह जीतने के बाद क्या करेंगे? वैसे तो सितारगंज में 70 फीसदी बाहरी के ही लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि श्याम विश्वास भी कोलकाता के रहने वाले हैं, लेकिन अब यहां बस गए। बात बाहरी की नहीं, बल्कि विकास की होनी चाहिए।

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विजय बहुगुणा पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरना शुरू किया। आपको क्या लगता है?

जवाब: हरीश रावत तो खुद ही भ्रष्टाचार के दल दल में फंसे हुए हैं। जो खुद अपनी कुर्सी बचाने की खातिर विधायकों की खरीद फरोख्त करता टीवी पर दिख रहा हो, मंत्रियों को लूट की खुली छूट देने की बात कर रहा हो । जिसका सचिव आबकारी में करोड़ों की घूस की बात करता दिख रहा हो? उसे पहले खुद के गिरबां में झांक कर देखना चाहिए। जनता को हरीश रावत की हकीकत पता है। जो जैसा होता है उसे सारे अपने जैसे ही दिखते हैं।

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की। उससे जनता को दिक्कत हुई। इसका कितना असर चुनाव में रहेगा?

जवाब: यह सही है कि नोटबंदी से कुछ दिक्कतें लोगों को हुई, लेकिन ज्यादातर लोग इस फैसले में मोदी के साथ दिख रहे हैं। लोग यह मान रहे हैं कि मोदी ने नोटबंदी का फैसला ठीक लिया है। इसका विधानसभा चुनाव में सकारात्मक असर पड़ेगा।



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