7th December 2018 21

संगीनों के साए में सोते से उठाए गए श्रमिक


एएलसी दफ्तर से स्पार्क मिंडा और इंटरआर्क कंपनी के गेट से श्रमिकों को उठाया

श्रमिकों ने पुलिस पर लगाया हाथापाई, मारपीट और अभद्रता का आरोप

दोनों कंपनी के दर्जनभर श्रमिकों को जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती

अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शनरत स्पार्क मिंडा और इंटरआर्क कंपनी के श्रमिकों को आज जबरन उठा दिया गया। वाक्या उस वक्त का है जब एएलसी दफ्तर और इंटरआर्क कंपनी के बाहर श्रमिक सुबह सो रहे थे। तभी पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारियों भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ धरना स्थल पर पहुंच गए। श्रमिकों को सोते से उठाया गया और जो नहीं उठे उन्हें जबरन उठाया गया। पुलिस ने श्रमिकों धरना और आमरण अनशन खत्म करने की चेतावनी दी, लेकिन जब श्रमिकों ने इंकार कर दिया तो पुलिस हलका बल प्रयोग किया। एएलसी दफ्तर से श्रमिकों को बाहर कर दिया गया और उनका टेंट उखाड़ कर गांधी पार्क में फेंक दिया गया। एएलसी दफ्तर और इंटरआर्क के बाहर बैठे एक दर्जन के करीब लोगों को बीमार बता कर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। जबकि मजदूर लगातार इसका विरोध कर रहे थे। 


मिंडा श्रमिकों का टेंट उखाड़ कर गांधी पार्क में फेंका

श्रमिक बोले, हम बगैर माइक के शांति पूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे

बीती रात पहुंची एसडीएम ने दी थी धरना खत्म करने की चेतावनी

रुद्रपुर। स्पार्क मिंडा के श्रमिक सुबह एएलसी दफ्तर में टेंट लगाकर रजाई और कंबलों में सोए हुए थे। तभी पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए और सोते श्रमिकों को जबरन उठा दिया गया। उनका टेंट उखाड़ कर पुलिस ने गांधी पार्क में फेंक दिया और श्रमिकों को एएलसी दफ्तर से बाहर कर दिया। साथ ही चेतावनी दी गई कि अब वह एएलसी दफ्तर में किसी तरह का धरना प्रदर्शन नहीं करेंगे। 

आपको बता दें कि मिंडा प्रबंधन और श्रमिकों के बीच लंबे समय से तकरार चल रही है और इसकी वजह बना श्रमिकों द्वारा संगठन बनाने का फैसला। इसके बाद दोनो ओर से तकरार बढ़ती गई। तमाम तरह के आरोप लगाते हुए प्रबंधन ने कुछ श्रमिकों पर गेट बंदी लगा दी और इसके खिलाफ श्रमिक धरने पर बैठ गए। इसके बाद तमाम बार वार्ता के प्रयास किए गए, लेकिन वार्ता सफल नहीं हुई। इसबीच 180 श्रमिकों पर गेटबंदी लागू कर दी गई। इससे तकरार और बढ़ गई। इधर, लगातार प्रयास के बाद भी जब वार्ता सफल होती नहीं दिखी तो प्रशासन ने चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर श्रमिकों को एएलसी दफ्तर से उठाने का फैसला कर लिया। इसको लेकर रात एसडीएम युक्ता मिश्रा रात श्रमिकों से मिली और धरना खत्म करने को कहा। हालांकि श्रमिकों ने शुक्रवार वार्ता तक के लिए समय मांग लिया। इसके इतर सुबह साढ़े सात बजे एसडीएम युक्ता मिश्रा, एसपी सिटी देवेंद्र पिंचा, कोतवाल, पंतनगर थानाध्यक्ष, सिडकुल पुलिस और पीएसी मौके पर जा पहुंची। उस वक्त श्रमिक सो रहे थे और उन्हें जबरन उठा दिया गया। सभी श्रमिकों को एएलसी दफ्तर से बाहर कर दिया गया और उनका टेंट उखाड़ कर गांधी पार्क में फेंक दिया गया। मौके पर एंबुलेंस भी पहुंची। जिसमें श्रमिक हेमचंद्र, सुमित सिंह, हेमचंद्र नैनवाल, मनोज पांडे, आशा देवी, तारा आर्या को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। कहा गया कि उक्त श्रमिकों की तबीयत बिगड़ रही थी। पुलिस प्रशासन के जाने के बाद श्रमिकों ने एएलसी दफ्तर के बाहर डेरा जमा लिया। श्रमिकों का कहना था कि पुलिस प्रशासन प्रबंधन की शह पर धरना खत्म कराने की साजिश रच रहा है। 

टूट रहा है मिंडा श्रमिकों का हौसला

श्रमिकों और प्रबंधन के बीच इस बात पर ठनी थी कि श्रमिक अपना संगठन बनाना चाहते थे और प्रबंधन इसके लिए तैयार नहीं था। ऐसे में दोनों के बीच रार बढ़ी और श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा। गेटबंदी के साथ श्रमिकों का वेतन भी रोक दिया गया। लगातार धरने पर डटे रहने के बावजूद जब मामले का हल निकलता नहीं दिखाई दिया तो श्रमिकों का हौसला टूटने लगा। अब श्रमिकों का कहना है कि रोजगार उनकी पहली प्राथमिका है और अब हमारी यही मांग है कि पहले उन 180 लोगों की गेटबंदी से प्रतिबंध हटाया जाए। ताकि लोगों के घर चल सकें। बाकि संगठन बनाने की जो मांग थी उसकी फाइल श्रमायुक्त दफ्तरों में चल रही है।  




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