4th October 2018 15

रोहिंग्या की वापसी का सिलसिला शुरू


आज वापस भेजे गए असम में रह रहे सात रोहिंग्या
सातों रोहिंग्याओं को विदेशी कानून के उल्लंघन के आरोप में 29 जुलाई 2012 को किया गया था गिरफ्तार
नई दिल्ली। असम में गैरकानूनी तरीके से रह रहे सात रोहिंग्या प्रवासियों को भारत आज म्यामांर वापस भेजेगा। केन्द्र सरकार पहली बार ऐसा कदम उठा रही है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद 2012 से ही ये लोग असम के सिलचर जिले के कचार केन्द्रीय कारागार में बंद हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को मणिपुर की मोरेह सीमा चौकी पर सात रोहिंग्या प्रवासियों को म्यामांर के अधिकारियों को सौंपा जाएगा। अधिकारी ने बताया कि म्यामांर के राजनयिकों को कांसुलर पहुंच प्रदान की गई थी। उन्होंने इन प्रवासियों के पहचान की पुष्टि की। अन्य अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी देश की सरकार के गैरकानूनी प्रवासियों के पते की रखाइन राज्य में पुष्टि करने के बाद इनके म्यामांर के नागरिक होने की पुष्टि हुई है।
बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थियों को उनके देश वापस भेजने का मुद्दा पिछले कुछ समय से भारतीय राजनीति के केंद्र में रहा है। इस विवाद के बीच आज भारत सरकार पहली बार देश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को म्यांमार वापस भेज रही है। इस पहली किस्त में 7 लोगों को वापस भेजा जा रहा है। गुरुवार की सुबह करीब 7.30 बजे उन्हें इम्फाल से मणिपुर की मोरेह सीमा पर ले जाया गया, जिसके बाद उन्हें म्यांमार इमिग्रेशन ऑफिस में भेज दिया गया। यहां पर ही उनके सभी कागजातों की जांच की गई। दरअसल, सातों रोहिंग्या असम के सिलचर में मौजूद हिरासत केन्द्र में बंद थे। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के एक अफसर के मुताबिक गुरुवार को मणिपुर की मोरेह सीमा चौकी पर 7 रोहिंग्या प्रवासियों को म्यांमार के अधिकारियों को सौंपा जाना है। पड़ोसी देश की सरकार के गैरकानूनी प्रवासियों के पते की रखाइन राज्य में पुष्टि करने के बाद इनके म्यांमार के नागरिक होने की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब रोहिंग्या प्रवासियों को भारत से म्यांमार भेज रही है। गौरतलब है कि सात रोहिंग्या लोगों को विदेशी कानून के उल्लंघन के आरोप में 29 जुलाई 2012 को गिरफ्तार किया गया था।
काचार जिले के अफसरों ने बताया कि जिन्हें वापस भेजा जा रहा है, उनमें मोहम्मद जमाल, मोहबुल खान, जमाल हुसैन, मोहम्मद युनूस, सबीर अहमद, रहीम उद्दीन और मोहम्मद सलाम शामिल हैं। इनकी उम्र 26 से 32 वर्ष के बीच है। भारत सरकार ने पिछले साल संसद को बताया था कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर में पंजीकृत 14000 से अधिक रोहिंग्या भारत में रहते हैं। हालांकि मदद प्रदान करने वाली एजेंसियों ने देश में रहने वाले रोहिंग्या लोगों की संख्या करीब 40000 बताई है। रखाइन राज्य में म्यामांर सेना के कथित अभियान के बाद रोहिंग्या लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागे थे। संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्या समुदाय को सबसे अधिक दमित अल्पसंख्यक बताता है। मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रोहिंग्या लोगों की दुर्दशा लिए आंग सान सू चीऔर उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।


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