8th January 2017 210

मंत्री पुत्रों की अनदेखी न पड़ जाए भारी


आम जनता में बनी हुई है बेदाग छवि

राजेश सरकार 9837451214

हल्द्वानी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। ऐसे में हर सियासी दल हर तरह के पैतरे अपनाने में जुटा हुआ है। कांग्रेस के पास सीटों को अपनी ओर खींचने की संजीवनी तो है मगर हाईकमान को शायद इसका पता ही नहीं है। हम बात कर रहे हैं सत्तासीन कांग्रेस के मंत्री पुत्रों की। करीब पांच मंत्री पुत्र पुत्री राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी हैं। खास बात यह है कि इन मंत्री पुत्रों की जनता में छवि भी साफ  सुथरी है और किसी तरह का दाग नहीं है, लेकिन अभी तक हाईकमान शायद इस संजीवनी का इस्तेमाल करने की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। 

मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे आनंद रावत कांग्रेस युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में संगठन मेें प्रदेश महामंत्री का दायित्व निभा रहे हैं। पिछले वर्ष से वे कुमाऊंनी संस्कृति को बढ़ावा देने व नशे की रोकथाम को अभियान चला रहे हैं। खासकर उनका मृदु व्यवहार उन्हें बरबस ही जनता की ओर खींच लेता हैं वहीं सीएम के दूसरे पुत्र वीरेंद्र रावत भी आए दिन सामाजिक कार्यो के जरिये जनता की मदद को तत्पर रहते हैं। सीएम की पुत्री व कांग्रेस महिला प्रदेश उपाध्यक्ष अनुपमा रावत भी कांग्रेस की मजबूती को लेकर संघर्ष कर रही हैं। वहीं सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य के पुत्र उत्तराखंड सहकारी बैंक प्रदेश अध्यक्ष संजीव आर्य मिलनसार और व्यवहार कुशल होने के साथ ही सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए रात दिन एक किए हुए हैं। वित्त मंत्री इंदिरा ह्रदयेश के पुत्र सुमित ह्रदयेश वर्तमान में हल्द्वानी मंडी समिति के अध्यक्ष  हैं। वे मंडी के जरिये किसानों की सेवा कर उनके बीच पैठ बना चुके हैं। इतना ही नहीं वे लगातार सामाजिक कार्यो में भागीदारी कर युवाओं क प्रेरणास्रोत बने हुए हैं और हजारों युवाओं को कांग्रेस में शामिल करा चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी इन होनहारों को हाईकमान ने अब तक तरजीह नहीं दी है। हालांकि वक्त अब भी है। यदि भी हाईकमान मंत्री पुत्रों की प्रतिभा को पहचान उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंंपे तो इतना जरूर है कि मंत्री पुत्र भी हाईकमान को निराश नहीं करेंगे।



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