14th April 2019 97

महानगर के सिटी क्लब में नेचुरोपैथी का सेमिनार 20 को


क्लींजिंग ठेर नेम थेरेपी के प्रणेता डा. पीयूष सक्सेना देंगे स्वस्थ रहने के टिप्स

रुद्रपुर। अंग्रेजी दवाओं के दुष्परिणामों के बारे में सभी जानते ही हैं कि यह दवाएं कितनी तेजी से शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित करती हैं, फिर भी हम इन दवाइयों के गुलाम हो गए हैं। बहुत कम लोग ही होंगे जिनकी जिंदगी की गाड़ी बिना किसी दवाई के दौड़ रही होगी। 

आज भागमभाग जीवनशैली के मध्य रोटी से ज्यादा दवाई पर निर्भर है। दवा भी अपने आप में एक बीमारी है। प्रत्येक दवा का एक रिएक्शन होता है। कई बार यह रिएक्शन हमारे लीवर, किडनी को भी प्रभावित करता है। किडनी एवं लीवर मानव शरीर का मूल अंग है, क्लीजिंग थेरेपी के प्रेरणा डा. पियूष सक्सेना बढ़ते प्रदूषण, पैरासाइट, बिगड़ी दिनचर्या एवं दवाओं के दुष्प्रभाव को तमाम बीमारियों की जड़ मानते हैं, इसके चलते शरीर में टाक्सिंग जमा होते रहते हैं, जिससे शरीर के अंग सही ढंग से काम नहीं कर पाते। शरीर से यदि इन टाक्सिंग को बाहर निकाल दिया जाए तो लगभग 90 प्रतिशत स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज हो जाता है।  शरीर से टाक्सिंस बाहर निकालने की प्रक्रिया को क्लीजिंग थेरेपी कहते हैं।

 क्लीजिंग थेरेपी में प्रतिदिन इस्तेमाल की चीजों के कभी कभी सेवन से शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे लीवर, किडनी इत्यादि की सफाई की जाती है। क्लीजिंग थेरेपी में आपको परहेज की जरूरत नहीं है। आप सब कुछ खा पी सकते हैं और जिंदगी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। बस समय समय पर क्लीजिंग करते रहे। इससे आप रोग ग्रस्त होने से बचे रहेंगे। लीवर और किडनी तीन चौथाई गड़बड़ी की दशा में भी अपना काम करते रहते हैं, इसलिए हमें इनके बीमार होने का पता ही नहीं चलता, इन्हें समय समय पर क्लीन करते रहेंगे तो व्यक्ति सदैव स्वस्थ रहेंगे। लीवर क्लीजिंग से लीवर के साथ साथ गॉल ब्लैडर के स्टोंस भी समाप्त हो जाते हैं और हार्ट अटैक का खतरा  भी टल जाता है, क्योंकि शरीर से एलडीएल यानी दिल के लिए खराब कोलेस्ट्रॉल से छुटकारा मिल जाता है।

 इस थेरेपी को रुद्रपुर के कुछ जागरूक लोगों द्वारा आजमाया गया, जिससे इनके किडनी के स्टोन, पित्ताशय (गॉलब्लेडर) व अन्य स्थानों पर पनप रही पथरियां मल मूत्र के रास्ते बाहर निकल जाती हैं एवं आर्टिरीज के ब्लॉकेज खुल जाते हैं। क्लीजिंग करने के बाद शरीर में हल्का पन, चेहरे पर चमक एवं भरपूर एनर्जी मिलने लगती है। डा. पीयूष सक्सेना की इस थेरेपी से प्रभावित होकर इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से रुद्रपुर सिटी क्लब में 20 अप्रैल को 4:30 बजे से एक सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्वयं डा. पीयूष सक्सेना मुख्य वक्ता होंगे।

 यह कार्यक्रम पूर्णता निशुल्क होगा। इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु समय से पहुंचे। कार्यक्रम चार बजे से छह बजे तक रहेगा। सीटों का आवंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर रखा गया है। रुद्रपुर में इस तरह थेरेपी को करने वाले जागरूक वालिटिंयर्स में मुख्य रूप से प्रदीप बंसल, सीए अशोक सिंघल, सीए हरनाम चौधरी, शिव कुमार बंसल, राजकुमार, विजय भूषण गर्ग, किशोर शर्मा, चरणजीत, ललित मिगलानी, अंकुर श्यामपुरिया, भरत शाह, पम्मी सुखीजा,  राजकुमार पटेल समेत लगभग 400 से 500 लोग लाभान्वित हो चुके हैं।


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