31st October 2017 232

एकादशी के दिन करें ये परहेज, मिलेगा शुभ फल


एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। एकादशी के दिन एक भूल भी शुभ फल से वंचित कर सकती है। इस दिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका सेवन करना नुकसानदेय माना जाता है। एकादशी में भूलकर भी इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन लहसुन, प्याज का सेवन करना भी वर्जित है। इसे गंध युक्त और मन में काम भाव बढ़ाने की क्षमता के कारण अशुद्ध माना गया है। इसी प्रकार एकादशी और द्वादशी को बैंगन, सेम, मांस और मदिरा का सेवन खाना अशुभ होता है। अंडा नहीं खाएं और झूठ, ठगी आदि का त्याग कर दें। कहते हैं कि एकादशी के दिन सेम का सेवन करना संतान के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं, मांस मदिरा का सेवन करने वाले को नर्क की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।

यह है पौराणिक कथा

एक कथा के अनुसार माता के क्रोध से रक्षा के लिए महर्षि मेधा ने देह त्याग दी थी। उनके शरीर का अंश भूमि में समा गया। कालांतर में वही अंश जौ एवं चावल के रूप में भूमि से उत्पन्न हुआ। कहा जाता है कि जब महर्षि की देह भूमि में समाई, उस दिन एकादशी थी। अत: प्राचीन काल से ही यह परंपरा शुरू हो गई कि एकादशी के दिन चावल एवं जौ से बने भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए एकादशी के दिन इन पदार्थों का सेवन महर्षि की देह के सेवन के समान माना गया है।

एकादशी के दिन शरीर में जल की मात्र जितनी कम रहेगी, व्रत पूर्ण करने में उतनी ही अधिक सात्विकता रहेगी। आदिकाल में देवर्षि नारद ने एक हजार साल तक एकादशी का निर्जल व्रत करके नारायण भक्ति प्राप्त की थी। वैष्णव के लिए यह सर्वश्रेष्ठ व्रत है। चंद्रमा मन को अधिक चलायमान न कर पाएं, इसीलिए व्रती इस दिन चावल खाने से परहेज करते हैं।

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार यह है तर्क

विज्ञान के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। ज्योतिष शास्‍त्र की मानें, तो जल तत्व की अधिकता मन को विचलित कर सकती है, क्योंकि जल और चंद्रमा में परस्पर आकर्षण होता है। चंद्रमा के कारण समुद्र में ज्वार आता है। इस प्रकार चावल का अधिक सेवन करने पर यदि शरीर में जल तत्व की मात्रा अधिक होगी, तो मन अशांत महसूस करता है। अशांत मन से व्रत का पालन नहीं हो पाएगा। चूंकि एकादशी व्रत, संयम और साधना का दिन है इसलिए मन को विचलित करने वाली चीजों से दूर रहने को कहा जाता है।


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