24th March 2017 182

चैत्र नवरात्र 28 मार्च से, मां से मांगें सुख समृद्धि


इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के 

नाव पर सवार होकर आएंगी मां

नवसंवत्सर हिंदू नववर्ष होगा शुरू

रुद्रपुर। चैत्र नवरात्र शुरू होने में अब केवल तीन दिन शेष बचे हैं। 28 मार्च से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र पांच अप्रैल राम नवमी को कन्याओं को जिमाने के साथ पूर्ण  होंगे। ज्योतिषाचार्य की माने तो इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के हैं। मंदिरों में नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। नौ देवियों की पूजा के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान भी रखना जरूरी होता है। 

मलिक कालोनी स्थित शिव मंदिर के पुजारी वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 28 मार्च को सुबह 8.27 बजे शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन सुबह 6.24 बजे तक रहेगी। चैत्र नवरात्र के साथ ही नवसंवत्सर यानी हिंदू नववर्ष भी शुरू हो जाता है। पहले नवरात्र को घटस्थापन (कलश स्थापना) किया जाता है। सामान्य मिट्टी के बर्तन या ताम्र के बर्तन में कलश की स्थापना कर सकते हैं। अखंड जोत करने वाले श्रद्धालु कलश स्थापना में दो नारियल, इसमें से एक कलश के ऊपर तथा दूसरा अखंड ज्योत के पास रखें।  पहले मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें हरियाली के प्रतीक जौ बोएं। इसके बाद कलश को विधिपूर्वक स्थापित करें। मां की प्रतिमा स्थापित करें और पूजन करने से पहले भगवान गणेश का पूजन करें। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। घटस्थापन का अभिजीत मुहूर्त 28 मार्च को दोपहर 12.09 से 12.57 बजे तक शुभ होगा। 0000 के अनुसार उपवास में प्रत्येक दिन विभिन्न इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। शैलपुत्री का रूप वाणी का है लिहाजा शैलपुत्री की पूजा के दिन वाणी पर पर नियंत्रण रखना चाहिए, ब्रह्माचारिणी की पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, चंद्रघंटा का रूप सच्ची व स्वच्छ बातों का श्रवण करना है, कुष्मांडा का रूप भोजन आदि पर नियंत्रण रखना बताता है, स्कंदमाता का रूप नेत्र पर नियंत्रण करने के लिए है, कात्यायनी का रूप विचारों में नियंत्रण करना सिखाता है। कालरात्रि के रूप में माता भक्तों को काल पर नियंत्रण करने और महागौरी व्रती के अहंकार की प्रवृति समाप्त करने के लिए है। जबकि सिद्धिदात्री के रूप में माता हर कार्य सिद्ध करने का आशीर्वाद देती है। 

चैत्र नवरात्र में इस बार मां दुर्गा का आगमन नाव से होगा व गमन हाथी पर होगा। यह अति शुभ माना जाता है। देवी पुराण में नवरात्र में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताए गए हैं। इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है। दुर्गा जी नाव पर सवार होकर आएंगी एवं बुधवार को ही विसर्जन होने से हाथी पर बैठकर जाएंगी। देवी पुराण के अनुसार आगमन के लिए वाहन रविवार व सोमवार को हाथी, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा, गुरुवार व शुक्रवार को पालकी व बुधवार को नौका पर आगमन होता है। इस साल नौका पर सवार होकर आ रही मां अपने भक्तों को हर प्रकार से सुख और समृद्धि देने वाली हैं।


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