12th July 2018 13

सिर्फ कागजों में बिल बनाते रहे टीडीसी के अफसर


टीडीसी बीज घोटाले में तीन अफसर होंगे गिरफ्तार

एसआईटी आरोपपत्र लगाने की तैयारी में

रुद्रपुर। टीडीसी के गेहूं बीज घोटाले में पूर्व में गिरफ्तार तीन कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर लिया गया है। तीन अन्य अफसरों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। टीडीसी के अधिकारियों ने कागजों में ऐसा फर्जीबाड़ा किया है कि जो व्यवहारिक नहीं है। मसलन एक ही नंबर की गाड़ी लगातार दो दिन वाराणसी गेहूं बीज भेजना दर्शाया गया है। इसके अलावा विवेचना में जिस वाहन से चार सौ क्विंटल गेहूं भेजना दिखाया गया है वह टैंपो का नंबर निकला। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिहार भेजे गए जिस गेहूं के बीज को खराब बताया गया, वह न तो वापस आया और न ही पुन: दो कट्टे के साथ एक कट्टा फ्री की स्कीम के तहत उसे कहीं भेजा गया। हां ट्रांसपोर्ट के नाम पर खर्चा जरूर दिखाया गया।

गौरतलब है कि 16 करोड़ के टीडीसी बीज घोटाले में एसआईटी ने तीन कर्मचारियों को पहले ही जेल भेज दिया था। इस घोटाले में आरोपी बन रहे सेवानिवृत मुख्य अभियंता पीके चौहान, उपमुख्य विपणन अधिकारी अजीत सिंह और लेखाकार गिरीश चंद्र तिवारी की गिरफ्तारी पर स्टे था, जिसे टीडीसी ने कोर्ट से खारिज करा लिया है। कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद उक्त तीनों की गिरफ्तारी के आसार बन गए हैं। सूत्रों ने बताया कि एक ही वाहन से दो दिन लगातार वाराणसी गेहूं का बीज भेजना दर्शाया गया, जबकि वाराणसी से एक वाहन की 24 घंटे में वापसी नामुमकिन है। इसके अलावा एक टैंपो से चार सौ क्विंटल गेहूं का बीज पहुंचाने के फर्जीबाड़े का खुलासा हुआ। दरअसल, विवेचना में यह बात साफ हो गई है कि टीडीसी ने बिहार गेहूं का बीज बेचा था। बाद में उस बीज को खराब दर्शाया गया। उस माल को वापस मंगाने के नाम पर ट्रांसपोर्ट का बिल बना कर हड़प लिया गया। इसके बाद टीडीसी के अफसरों ने दो कट्टे के साथ एक कट्टा बीज फ्री देने की स्कीम निकाली। इस योजना के तहत फिर से बिहार बीज भिजवाना दर्शाया गया। यानि बीज बिहार से न आया और न ही स्कीम के तहत वापस गया। सिर्फ कागजों में एडजस्टमेंट  करके करोड़ों का घोटाला किया गया। अब एसआईटी इस मामले में आरोपपत्र दायर करने की तैयारी कर रही है। तीन अन्य अफसर भी शीघ्र ही सलाखों के पीछे होंगे।


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