21st August 2018 72

चलती बस में कत्ल या कूद कर मरा नेपाली


दिल्ली से हाथ पैर बांध कर दीपक को नेपाल ले जा रहे थे साथी

रामपुर रुद्रपुर सीमा पर चलती बस में हादसा, मौके पर मौत

बस में सवार सभी यात्री बंगलौर से काम कर लौट रहे थे घर

रुद्रपुर। दिल्ली से नेपाल जा रही एक बस से गिर कर नेपाली की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मृतक ने खुद बस की खिड़की से छलांग लगाई या फिर उसे बस से फेंक दिया। देर रात युवक की लाश को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी मृतकों के परिजनों को दी और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पोस्टमार्टम के लिए दोपहर तक परिजनों का इंतजार करती रही।

दीपक सिंह (35) पुत्र पीरू सिंह मूलरूप से तुलकोट गांव पालिका बड़ांग नेपाल का रहने वाला है। कुछ माह पूर्व वह अपने साथियों के साथ काम के बंगलौर आया था। बताया जाता है कि तीन दिन पहले 40 नेपालियों का एक दल बंगलौर से नेपाल के लिए निकला था। इस दल में दीपक भी शामिल था। बताया जाता है कि बीते रोज सभी दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पर पहुंचे और वहां से बस संख्या ना ७७ख११२० में सवार हो गए। देर रात बस दिल्ली से महेंद्रनगर नेपाल के लिए रवाना हुई। बताया जाता है कि बस रात करीब दो बजे रामपुर रुद्रपुर सीमा पर पहुंची थी कि तभी दीपक ने चलती बस की खिड़की से छलांग दी। तेज रफ्तार बस से कूदते ही सड़क पर गिरे दीपक की मौत हो गई। पांच किलो मीटर आगे निकल जाने के बाद बस चालक ने बस वापस मोड़ी। आनन फानन में बस सवारों ने इसकी सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी। रात ही एंबुलेंस दीपक को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दीपक के सिर पर गहरी चोट के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई है। इधर, सूचना पर रम्पुरा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और परिजनों को सूचना देने के साथ शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीपक के साथ बस में सवार लोगों का कहना था कि दीपक मानसिक रूप से विक्षिप्त था और उसके हाथ पैर बांध कर दिल्ली से नेपाल ले जाया जा रहा था, लेकिन रात जब बस में सब सो गए तो न जाने कैसे उसने अपने हाथ पैर खोल लिए और बस से छलांग लगा दी। इधर, मामले में पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के बाद ही कुछ बता पाने की बात कह रही है। 

पंचनामा में दस्तखत से मुकरे दीपक के साथी

मामले में बताया जाता है कि मृतक और बस में सवार लोग सभी एक ही स्थान के रहने वाले हैं। रात से लेकर सुबह और पोस्टमार्टम हाउस तक सभी साथ थे, लेकिन जब पुलिस ने पांच लोगों को पंचनामा में दस्तखत करने के लिए बुलाया तो एक साथी भी आगे नहीं आया। जबकि इसके पहले तक सभी मृतक के बारे में सारी जानकारी पुलिस को दे रहे थे। पंचनामा न पाने की वजह से दोपहर तक मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका। पुलिस अब मृतक के परिजनों का इंतजार कर रही है, ताकि पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम हो सके। 

इतना विक्षिप्त था तो काम कैसे कर रहा था

दीपक के साथी संदेह के घेरे में हैं। साथियों की मानें तो दीपक पूरी तरह से मानसिक विक्षिप्त था। इतना ही बमुश्किल उसे बंगलौर से दिल्ली लाया गया और दिल्ली में उसने हंगामा काट दिया। मजबूरी में उसे हाथ पैर बांध कर दिल्ली स्टेशन पर रखना पड़ा। दिल्ली पुलिस से भी दीपक उलझ गया था। जहां हाथ पैर बांधने के बाद उसे साथियों ने सिगरेट के कश भी लगवाए। दोस्तों की बात में कितना दम कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन अगर वाकई दोस्त सही कह रहे हैं तो मानसिक विक्षिप्त होने पर दीपक काम कैसे कर रहा था। 


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