25th July 2018 30

राफेल पर खुलासा : यूपीए से सस्ती मोदी सरकार की डील


कांग्रेस सरकार ने 36 विमानों का सौदा किया था 1.69 लाख करोड़ में

भाजपा 59000 हजार करोड़ में सौदा कर एक विमान पर बचाये 59 करोड़

नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे में घोटाले की गूंज के बीच अब नया खुलासा हुआ है। एक न्यूज चैनल को पता चला है कि मोदी सरकार के दौरान हुई राफेल डील यूपीए सरकार की तुलना में हर विमान 59 करोड़ रुपये सस्ती है। यानी हर राफेल विमान पर मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार की तुलना में 59 करोड रुपये बचाए।

चैनल को मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ने इस विशेष विमान की डील में देश का पैसा बचाया है और कांग्रेस सरकार की तुलना में हर विमान का सौदा 59 करोड़ रुपये सस्ता किया गया है। इन दस्तावेजों के मुताबिक यूपीए सरकार के दौरान 36 राफेल विमान का सौदा 1.69 लाख करोड़ में किया गया था, जबकि मोदी सरकार ने यही सौदा 59000 हजार करोड़ रुपये में किया।

यानी कांग्रेस सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने हर विमान पर 59 करोड़ रुपये कम खर्च किया। इस हिसाब से मोदी सरकार ने एक विमान का सौदा 1646 करोड़ रुपये में किया, जबकि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एक विमान की कीमत 1705 करोड़ थी।

ज्यादा मजबूत है हेलीकॉप्टर

बता दें कि जिस विमान की डील मोदी सरकार ने की है वह यूपीए सरकार द्वारा लिए जा रहे विमान से काफी ज्यादा असरदार और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बताया जा रहा है। इस विमान के अंदर मेटेओर और स्कॉलाप जैसी मिसाइलें भी हैं, जो यूपीए की डील के तहत लिए जा रहे विमान में नहीं थीं। दस्तावेजों से ये जानकारी भी सामने आई है कि मोदी सरकार ने जिस विमान की डील की है, उसमें भारत के लिए विशेष रूप से 13 चीजें बढ़ाई गई हैं, जो दूसरे देशों को नहीं दी जाती हैं।

हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि इस नई डील में किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की बात नहीं हुई है। इसलिए अचानक दाम बढऩे की बात समझ नहीं आती है।  

कांग्रेस का घोटाले का आरोप

कांग्रेस राफेल डील को लेकर लंबे समय से मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रही है। सड़क से लेकर संसद तक और प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर सोशल मीडिया तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके नेता मोदी सरकार पर राफेल डील में घोटाले का आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार ने जिस विमान की डील की थी, उसी विमान को मोदी सरकार तीन गुना कीमत में खरीद रही है।

कांग्रेस का क्या है दावा?

पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि कई कंपनियों से बात करने के बाद दिसंबर, 2012 में राफेल को सेलेक्ट किया गया और 126 एयरक्राफ्ट लेने की बात की गई थी। मोदी सरकार ने जिस कंपनी को ये डील दी है उसके पास ना ही प्लेन एयरक्राफ्ट बनाने का अनुभव है और ना ही लड़ाकू एयरक्राफ्ट का। इसके कारण एचएएल के भी कई इंजीनियरों को अपनी नौकरी हाथ से गंवानी पड़ी।



Visitors: 294225
© 2018 Vasundhara Deep News. All rights reserved.