23rd March 2018 94

राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में खेलेगा हल्दूचौड़ का भुवी


खेल प्रेम और हौंसले ने हराया दिव्यांगता को

वाराणसी में आज से शुरू हुई प्रतियोगिता

जीवन राज

हल्द्वानी। लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती कवि हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तियां हल्दूचौड़ के भुवी पर सटीक बैठती है। जिन्होंने दिव्यांगता से लड़कर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। और अब राष्ट्रीय पैरा  बैडमिंटन प्रतियोगिता में उत्तराखंड की ओर से अपना जलवा दिखाएंगे।

जी हां 38 वर्ष की उम्र में एक सड़क हादसे में अपने दोनों पैर खो देने के बावजूद परिवार के भरण पोषण के साथ साथ खेल में भी अपना जज्बा दिखाया। इसी मेहनत की बदौलत उन्हें आज प्रदेश के छह दिव्यांग खिलाडिय़ों में जगह मिली हैं। अपने जज्बे के दम पर उन्होंने प्रदेश के दिव्यांग खिलाडिय़ों के लिए एक नई मिसाल पेश की है।

हल्दूचौड़ के 46 वर्षीय दिव्यांग भुवन चंद्र गुणवंत का चयन राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन के लिए हुआ है। इसकी खबर सुनते ही उनके परिजन खुशी से झूम उठे। हादसे में दोनों पैर खो देने के बाद भी गुणवंत ने हिम्मत व हौंसला नहीं हारा। गुणवंत की मेहनत और खेल प्रेम ने उनकी दिव्यांगता को आड़े नहीं आने दिया। जिसकी बदौलत उन्हें राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप के लिए उत्तराखंड के छह श्रेष्ठ खिलाडिय़ों में जगह मिली। वाराणसी में आज से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेगें। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के छह खिलाड़ी उत्तराखंड से प्रतिभाग करेंगे, जिनमें एक गुणवंत भी है। उनके चयन परिवार के साथ साथ क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सभी गुणवंत के राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में पदक जीतने की दुआ कर रहे हैं। वह नैनीताल जिले से एक मात्र खिलाड़ी है जिनका चयन इस प्रतियोगिता के लिए हुआ है।

वही भुवन चंद गुणवंत ने बताया कि सरकार द्वारा विकलांग खिलाडिय़ों के प्रोत्साहन के लिए कोई प्रयास नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से दिव्यांग खिलाडिय़ों को खेल के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उचित उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं अगर सरकार साथ दे तो दिव्यांग खिलाड़ी देश में ही नहीं, विदेशों में भी उत्तराखंड का परचम लहराएंगे।


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