14th September 2018 41

अंग्रेजी पर फिदा, हिन्दी से जुदा युवा


सोशल मीडिया पर हिंग्लिश का कब्जा
रोजगार के आवेदनों में भी अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल
जीवन राज, हल्द्वानी।

आज देशभर में हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है। कई जगह हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन भी किया जा रहा है। लेकिन सोशल मीडिया के दौड़ में हिन्दी शब्दों की जगह अंग्रेजी शब्दों ने कब्जा जमा लिया है। वहीं इंग्लिश स्कूलों में पढऩे वाले कई विद्यार्थी शुद्ध हिन्दी नहीं लिख पाते हैं। जबकि सरकारी स्कूलों में पढ़ा विद्यार्थी काफी हद तक अच्छी हिन्दी लिख लेता है।
सोशल मीडिया के दौर में हिन्दी के नमस्ते पर अंगे्रजी के हाई और हैल्लो ने अपनी धाक जमा ली है। साथ ही हिंग्लिश भाषा अपनी अलग छाप छोड़ दी है। आज बढ़ती टैक्नोलॉजी के दौर में सभी जगह अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल होता है। इससे भी युवाओं पर खासा प्रभाव पड़ा हैं। रोजगार के ज्यादातर आवेदन का अंग्रेजी में भरे जाते है। इससे युवाओं का रूझान अंग्रेजी की ओर बढ़ा हैं। रोजगार की तलाश में युवा वर्ग अंग्रेजी की ओर रुख कर हिन्दी की तरफ मुख मोड़ रहा हैं। इससे हिन्दी भाषा पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। स्कूलों में हिन्दी को एक अनिवार्य विषय के रूप में रखा गया है, परन्तु फिर भी हर साल सैकड़ों विद्यार्थी हिन्दी जैसे विषय में भी फेल हो जाते हैं।
हिन्दी भाषा जितनी बोलने में सरल है उससे ज्यादा आज लोगों को शुद्ध हिन्दी लिखने में कठिनाई होती हैं। हिन्दी वाक्यों के अंदर अंग्रेजी के शब्दों को डालना जैसी आज हमारी आदत में शुमार हो गया है। हालांकि आज हिन्दी लिखने के लिए गूगल में कई एप भी आ गये हैं। जिन युवाओं को अंग्रेजी नहीं आती उनके लिए हंग्रेजी भाषा पहली पसंद बनी हंै। लेकिन मुख्य बात है हिन्दी भाषा का ज्ञान होना। जब तक आपको शुद्ध हिन्दी लिखनी नहीं आती, तब तक आप हिन्दी लिख नहीं सकते हैं। वही इतिहासकारों का मानना है कि देश को स्वतंत्र कराने वाले लोग अंग्रेजी भाषा से अनभिज्ञ थे। जिनकी संख्या करोड़ों में थी। ये स्वाधीनता सेनानी, क्रांतिकारी अपनी क्षेत्रीय भाषा के अलावा हिन्दी भाषा के ज्ञाता थे। लेकिन आज का युवा लगातार अंग्रेजी पर फिदा और हिन्दी से जुदा होते जा रहा है, जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।



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