10th June 2018 2156

जौहार मुनस्यार से दुबई तक छलका दर्द


ऐजा रे बाट त्यारा चैरेई डाव, बोट, पंछी सारा...

जीवन राज

हल्द्वानी। अपने सुरों से उत्तराखंड ही नहीं विदेशों में भी डंका बजाने वाले पप्पू कार्की आज पंचतत्व में विलीन हो गये। उनके निधन की खबर से उत्तराखंड से दुबई तक के प्रशंसकों को गहरा सदमा लगा है। पप्पू कार्की दिल्ली, मुबंई, गाजियाबाद, लखनऊ के अलावा दुबई में भी अपने कई शो कर चुके थे। जितने चाहने वाले उनके उत्तराखंड में है उससे भी ज्यादा प्रशंसक दुबई में भी हैं। 

दुबई में लाली ओ लाली हौसिया, पार भीड़े की बसंती छोड़ी, डीडीहाट की जमुना छोरी में पिछली बार पप्पू कार्की ने अपने प्रसंशकों को खूब थिरकाया था। पर किसे पता था कि वह उनका अंतिम प्रोग्राम होगा। शनिवार को उनके निधन की खबर से जौहार मुनस्यार से दुबई तक लोगों का दर्द छलका। पिथौरागढ़ के छोटे से गांव शैलावन से निकले पप्पू कार्की ने दुनियां भर में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली। उनके ऐजा रे चैत बैशाखा मिलम जौहार गाने जहां पलायन की पीड़ा का दर्शाया। वहीं पहाड़ के दर्द को भी उजागर किया। गीतों के माध्यम से उन्होंने खाली होते पहाड़ के दर्द को लोगों तक पहुंचाया। 

इस गीत में कार्की ने पेड़ पौधों, गाड़ गधेरे, पशु पक्षी का जिक्र किया जो अपना दर्द बयां कर रहे हैं। खाली पड़े पहाड़ में, इस गीत के माध्यम से कार्की ने शहरों में पिज्जा, चाऊमीन, बर्गर खाने वालों को पहाड़ के खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी। इस गीत में पलायन का ऐसा दर्द छलकता है कि प्रदेश गया पहाड़ का युवा एक बार अपने पहाड़ लौटने की जरूर सोचेगा। लेकिन क्या पता था कि वह एक दिन खुद चले जाएंगे और कभी लौट के नहीं आएंगे। उन्होंने झोड़ा चाचरी, न्योली और लोकगीतों से लोगों को खूब थिरकाया। इस बार कार्की ने धुन में पहाड़ी गाना छम छम बाजली नेपाल में रिकार्ड किया था। जो हाल ही में रिलीज हुआ था। जो पहाड़ का दर्द उनकी गायकी में छलकता था शायद ही आगे कोई ऐसा गा पाये। उनके निधन से उत्तराखंड संस्कृति को बड़ी हानि हुई जिसे भरना बड़ा ही मुश्किल होगा।

शनिवार को एक लाख लोगों ने सुना मधुली गाना

हल्द्वानी। पप्पू कार्की के मधुली एलबम को शुक्रवार तक करीब साढ़े दस लाख लोगों ने देखा था। उनके निधन की खबर सुनते ही उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद लोग लगातार उनके गानों को यू ट्यूब पर सुनते रहे। शनिवार को उनके मधुली गाने को साढ़े ग्यारह लाख लोगों ने देखा। वहीं उनका हीरा समदणी गाना करीब 18 लाख में पहुंच चुका है। लाली ओ लाली हौसियां को करीब साढ़े तेरह लाख रिव्यू मिल चुके हैं। वही काजल कौ टिक लगे दे को साढ़े 15 लाख रिव्यू मिल चुके है। दिनभर लोगों ने उनके गाने सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।


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