21st August 2018 269

पढिय़े...कॉवेंट स्कूल में सरकारी किताब वाले बच्चों की अलग क्लास!


गदरपुर के एक कॉवेंट स्कूल ने बच्चों की बीच खोदी खाई

एनसीईआरटी की किताबें लाने वाले बच्चों की लगाई जा रही अलग क्लास

अभिभावकों पर निजी प्रकाशन की किताबें लेने का दबाव बना रहा प्रबंधन

रुद्रपुर। सदाचार का ज्ञान बांटने वाले स्कूल अब जेब भरने के लिए बच्चों के बीच नफरत का बीज बो रहे हैं। नफरत के बीज बोने की वजह बनी हैं एनसीईआरटी और प्राइवेट प्रकाशन की किताबें। जी हां, ऐसा ही एक नामी स्कूल है गदरपुर का रेड रोज कॉवेंट स्कूल। जहां अभिभावकों पर जबरन प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है और जो अभिभावक एनसीईआरटी की किताबें खरीद कर बच्चों को देते हैं, उन बच्चों को स्कूल प्रबंधन अलग क्लास में पढ़ाता है। ऐसे में बच्चों के बीच हीन भावना पैदा हो रही है। हालांकि शिकायत पर एसडीएम समेत मुख्य शिक्षा अधिकारी ने छापेमारी की थी। छापेमारी में खामियां मिली थी, लेकिन इसके बावजूद स्कूल के संचालन में कोई बदलाव नहीं आया। 

रेड रोज कॉवेंट स्कूल का मामला गदरपुर निवासी सुनील कुमार त्रिपाठी ने जिलाधिकारी की जनसुनवाई में उठाया था। सुनील ने बताया कि स्कूल में दो हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। हाल ही में सरकार ने सभी स्कूल में समान शिक्षा के लिए एनसीईआरटी की किताबें लागू की थी। ताकि सरकारी स्कूल और कॉवेंट स्कूल में पढऩे वाले बच्चों के बीच समानता हो और हीन भावना पैदा न हो, लेकिन रेड रोड स्कूल में ऐसा नहीं है। 

आरोप है कि रेड रोज स्कूल अभिभावकों पर निजी प्रकाशन की पुस्तकें खरीदने के दबाव बना रहा है। ताकि निजी प्रकाशन की पुस्तकों की खरीद से होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा स्कूल की झोली में आ सके। खैर, ऐसे तमाम अभिभावक हैं जो दबाव में आकर निजी प्रकाशन की पुस्तकें खरीद चुके हैं और ऐसे भी तमाम हैं जिन्होंने एनसीईआरटी की किताबें अपने बच्चों को मुहैया कराई हैं। अब स्कूल प्रबंधन ने एनसीईआरटी की किताबें लाने वाले बच्चों की क्लास निजी प्रकाशन की पुस्तक लाने वाले बच्चों से अलग कर दी है। सुनील कुमार त्रिपाठी का कहना है कि जब उन्होंने इस बात का विरोध किया तो उन्हें अपने बच्चों को स्कूल से निकालने की नौबत आ गई। जिसके बाद वह मामला लेकर जनसुनवाई में जिलाधिकारी के पास पहुंचे। जिलाधिकारी के आदेश पर स्कूल में छापा पड़ा और तमाम खामियां मिली। हालांकि आरोप है कि छापे के बाद भी स्कूल के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया।   

फीस 25 और लेट फीस 10 फीसद बढ़ाई गई

एनसीईआरटी की किताबें लागू होने के बाद जब स्कूल की कमाई पर असर पड़ा तो स्कूल प्रबंधन ने इस घाटे को पूरा करने का नया तरीका इजात कर लिया। स्कूल प्रबंधन ने फीस पर सीधा सीधा 25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी। साथ ही फीस देर से जमा करने वालों पर लेट फीस में 10 प्रतिशत का इजाफा कर दिया। ऐसे में सारा का सारा बोझ अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूरी में इस बोझ को ढो रहे हैं। 

सिंचाई विभाग की नहर पर है बसों का कब्जा

रेड रोज स्कूल में बच्चों की संख्या हजारों में हैं और बच्चों को स्कूल से घर और घर से स्कूल लाने के लिए बसों की व्यवस्था है, लेकिन इन बसों को खड़ा करने के लिए स्कूल प्रबंधन के पास जगह ही नहीं है। स्कूल प्रबंधन इन बसों को खड़ा करने के लिए सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करता है। पहले तो रोड किनारे यह बसें लगाई जाती है, जिसे रोड की चौड़ाई कम हो जाती है और राहगीरों को परेशानी होती है। दूसरा सिंचाई नहर को खतरा पैदा होता है।

आरोप निराधार हैं प्रिंसिलप

सारे आरोप निराधार हैं। इस मामले में हमने शिक्षा विभाग को सारे जवाब और क्लीयरीफिकेशन दे दिया है। हमारा स्कूल मानकों के हिसाब से ही संचालित किया जा रहा है। 

संदीप सिंह धालीवाल, प्रिंसिपल रेड रोज कान्वेंट स्कूल


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