26th July 2018 73

पाकिस्तान इमरान को बना सकता है कप्तान


जीत की ओर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ

पीटीआई को 122, पीएमएल (एन)को 60, पीपीपी को 35 सीटों पर बढ़त

आतंकी हाफिज सईद की पार्टी अल्लाह हू अकबर तहरीक का नहीं खुला खाता

लाहौर। पाकिस्तान में बीते बुधवार हुए आम चुनाव में अब तक के नतीजे और रुझानों में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ  सबसे आगे है। पीटीआई को 1२2 सीटों पर बढ़त मिली है तो वहीं नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज दूसरे नंबर पर है 65 सीटों पर आगे चल रही है। पीएमएल एन पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी 35 सीटों पर आगे चल रही है। 

बता दें कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में बुधवार को आम चुनाव के लिए मतदान संपन्न हुआ। मतदान खत्म होने के तुरंत बाद ही पूरे देश में वोटों की गिनती शुरू हो गई। वोटों की गिनती के दौरान पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) रुझानों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, अभी तक पाकिस्तान की हंग असेंबली बनती हुई दिख रही है। अभी तक आए रुझानों में पीटीआई 122, पीएमएनएल (एन) 60, पीपीपी 35 सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा 48 सीटों पर अन्य उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। कुल 272 सीटों में 270 सीटों के रुझान अबतक सामने आए हैं। पीएमएनएल (एन) के शहबाज शरीफ, पीपीपी के बिलावल भुट्टो, एमएमए के फजल उर रहमान, जमात, इस्लामी के सिराज उल हक अपनी अपनी सीट पर चुनाव हार गए हैं।

पीटीआई प्रमुख इमरान खान की कराची पूर्व से जीत हुई है। इसके अलावा वह बाकी चार नेशनल असेंबली सीटों पर आगे चल रहे हैं। पीएमएल एन प्रमुख शाहबाज शरीफ कराची पश्चिम से दो सीट पर आगे चल रहे हैं। पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी भी लरकाना में एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी पीटीआई उम्मीदवार से पीछे चल रहे हैं। पंजाब असेंबली में पीएमएल एन और पीटीआई के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। सिंध असेंबली में पीपीपी और खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई सबसे आगे चल रही है। पंजाब में पीएमएल एन 54 सीट और पीटीआई 43 सीटों पर आगे चल रही है। 

उधर आतंकी हाफिज सईद की पार्टी अल्लाह हू अकबर तहरीक को किसी सीट पर बढ़त नहीं मिली है। हाफिज सईद ने 265 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारा था। इस चुनाव में हाफिज की पार्टी का खाता तक नहीं खुला। वोटों की गिनती के बीच इमरान खान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके घर के आसपास भी पुलिस बल तैनात कर दिए घए हैं।

शरीफ ने लगाया धांधली का आरोप

रुझानों में पिछडऩे के बाद से ही नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल एन की ओर से चुनाव में धांधली का आरोप लगाया गया है। नवाज शरीफ  के छोटे भाई शहबाज शरीफ ने आरोप लगाया कि ये चुनाव पाकिस्तान के इतिहास के सबसे बेईमानी वाले चुनाव हैं। हम इन नतीजों को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान धोखे से चुनावों में बढ़त बनाए हुए हैं। हमारे कई समर्थकों को मतगणना स्थल से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना पर भारी मात्रा में गड़बड़ी की जा रही है।

इस बीच बिलावल भुट्टो की पार्टी पीएमएल एन की प्रवक्ता मरियम औरंगजेब ने मतों की गणना की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी के एजेंटों को कई निवार्चन क्षेत्रों के मतदान केंद्रों से बाहर किया गया है। आरोपों पर जबाव देते हुए पंजाब के प्रांतीय चुनाव आयुक्त ने कहा कि नेताओं को ऐसे निराधार आरोप लगाने से बचना चाहिए।

सरकार बनाने के लिए 137 सीटों की जरूरत

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य होते हैं जिनमें से 272 को सीधे तौर पर चुना जाता है जबकि शेष 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। आम चुनावों में 5 फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाली पार्टियां इन आरक्षित सीटों पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व के हिसाब से अपने प्रतिनिधि भेज सकती हैं। हालांकि, वर्तमान में कोई पार्टी तभी अकेले दम पर सरकार बना सकती है जब उसे 137 सीटें हासिल हो जाएं।

इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से और बिगड़ सकते हैं रिश्ते

पाकिस्तान में जो हो रहा है वो भारत के लिए सिर्फ एक सियासी घटना नहीं है। इमरान पीएम बने तो भारत पाकिस्तान में तल्खी बढ़ सकती है। इमरान खान भारत को लेकर आक्रामक रवैया अपनाते रहे हैं और खराब रिश्तों के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। इमरान खान का नारा था 'न्यू पाकिस्तानÓ लेकिन कहा जा रहा है कि इमरान युग के पाकिस्तान में सियासत से लेकर सियासतदां तक और समर्थन से लेकर विरोध तक सब फौज के मोहरे होंगे। चुनाव प्रचार के दौरान भी इमरान भारत के खिलाफ  जहर उगलते रहे थे। वो पाकिस्तानी सेना, कट्टरपंथियों के समर्थक माने जाते हैं और पाकिस्तान की राजनीति में सेना के प्रभाव को गलत नहीं मानते इसलिए द्विपक्षीय संबंधों की किताब को फिर से पलटकर देखने का मौका है क्योंकि जानकार कहते हैं अगर सरहद के पार इमरान खान सरकार बनते हैं तो पड़ोस के देश में फौजी बूटों और बंदूकों की धमक संसद के अंदर तक सुनाई पड़ेगी। विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद में इमरान की सरकार से डील करना भारत के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है और इसकी वजह उनका कट्टरपंथ की ओर रूझान है।


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