6th September 2018 180

युग हत्याकांड में तीन को फांसी


केस में 105 गवाहों के दर्ज किए गए बयान 

450 पेजों की जजमेंट हुई तैयार

हिमाचल/शिमला।  2014 में चार साल के मासूम युग की अपहरण के बाद पानी के टैंक में फेंककर हत्या के तीनों दोषियों को बुधवार को जिला एवं सेशन जज वीरेंद्र सिंह ने मौत की सजा सुनाई। दोषियों में रामबाजार निवासी चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पाल और दिल्ली का विक्रांत बख्श शामिल है।

राम बाजार में चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पाल और युग के पिता विनोद गुप्ता की दुकानें हैं। 14 जून 2014 को चंद्र और तेजेंद्र ने युग को किडनैप किया। तेजेंद्र के स्टोर में उसे कुछ खिलाकर बेहोश कर दिया। फिर गत्ते की पेटी में डालकर तीन किमी दूर एक मकान में रखा। उसी शाम सदर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गई। युग के पिता विनोद से तीन करोड़ 60 लाख रुपये फिरौती मांगी गई। फिर मांग बढ़कर चार करोड़, 10 करोड़ तक पहुंच गई। केस किडनैपिंग में बदल गया। पुलिस से जांच सीआईडी को सौंप दी गई। सीआईडी ने 22 अगस्त 2016 को केस क्रैक कर आरोपी पकड़ लिए। बताया कि युग को भराड़ी में स्थिति नगर निगम के पानी के टैंक में जिंदा फेंककर मार दिया था।

अदालत ने 302, 364ए, 120बी, 347, 201 और 506 में तीनों को अलग अलग सजा सुनाई। इस मामले में 105 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें से एक को छोड़कर सभी अपने बयान पर आखिर तक कायम रहे, जिस वजह से हत्यारों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को छह अगस्त को युग की हत्या में दोषी घोषित करार दिया था। मामले में 450 पेजों की जजमेंट तैयार की गई। बुधवार सुबह सवा 10 बजे तीनों को कोर्ट में लाया गया। जज वीरेंद्र ने दोपहर दो बजे कुर्सी से खड़े होकर फैसला सुनाना शुरू किया। 8 मिनट में जज ने तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाकर कलम तोड़ दी। साथ ही उन्हें हाईकोर्ट में अपील के लिए एक महीने का समय दिया है। युग के माता पिता ने फैसले पर खुशी जताई और कहा कि आज हमारे बेटे को मुक्ति मिल गई। 



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