18th October 2017 64

सुख समृद्धि, उत्साह से लबरेज है दीपों का पर्व दीपावली


रजत शर्मा, रुद्रपुर 9761288777

दिवाली को लेकर इस समय हर किसी की खास तैयारी चल रही है। कोई इस दिन खास मिठाई व पकवान बनाने को लेकर उत्सुक नजर आ रहा है, तो कोई घर की साज सजावट में व्यस्त दिखाई दे रहा है। लेकिन इसके साथ ही दीवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखते ही बन रहा है। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार दीवाली सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हर परिवार दिवाली की रात इसी कामना से लक्ष्मी पूजन करता है कि लक्ष्मी मां उस पर अपनी कृपा बनाए रखें। 

कुश के आसन पर बैठकर करें पूजा

पूजा  करते समय उसके आसन में बैठने का बहुत महत्व होता है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आपका आसन कुश को होना चाहिए। कुश यानि की घास का बना हुआ आसन जो पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए हमें कुश के आसन में बैठ कर पूजा करनी चाहिए।  दीपावली की रात माता लक्ष्मी और गणेश भगवान का पूजन किया जाता है। लेकिन यह ध्यान रखें कि लक्ष्मी मां की पूजा विष्णु भगवान के साथ ही करनी चाहिए।

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ समय 

प्रात: 10.30 से दोपहर 01.30 (लाभ अमृत)  03.00 से 04.30 (शुभ)

रात्रि 07.30 से 09.00 (लाभ)  रात्रि 10.00 से 12.00 तक।

देर रात्रि पूजन करने वालों के लिए रात्रि 12.00 से 01.30 तक।

लग्नानुसार

सुबह 06.44 से 09.01 (वृश्चिक लग्न) 09.01 से 11.06 (धनु लग्न) दोपहर 12.54 से 02.26 (कुंभ लग्न) 03.57 से शाम 05.37 (मेष लग्न) 05.37 से 08.36 (वृषभ लग्न) सिंह लग्न में पूजन का समय है रात्रि 12.06 से 02.18 तक।

दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त 

लाभ का चौघडिय़ा : 10.47 से 12.10 तक।  अमृत का चौघडिय़ा : 12.10 से 1.10 तक।  लाभ का चौघडिय़ा (सायंकाल) : 7.18 मिनट से 8.57 मिनट तक।

लग्न मुहूर्त

कुंभ: 1.3 मिनट से 2.26 मिनट |   वृषभ: 5.48 मिनट से 7.46 मिनट।  सिंह लग्न: रात्रि 12.15 मिनट से 2.31 मिनट तक।

कैसे करें माता लक्ष्मी पूजन विधि

सर्वप्रथम मां लक्ष्मी व गणेशजी की प्रतिमाओं को चौकी पर रखें। ध्यान रहे कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रहे और लक्ष्मीजी की प्रतिमा गणेशजी के दाहिनी ओर रहें।

कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक होता है।

एक दीपक को घी और दूसरे को तेल से भर कर और एक दीपक को चौकी के दाईं ओर तथा दूसरे को लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं के चरणों में रखें।

लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं से सुसज्जित चौकी के समक्ष एक और चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। लाल वस्त्र पर चावल से नवग्रह व रोली से स्वास्तिक एवं ओम का चिह्न बनाएं।

पूजा करने हेतु उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे। तत्पश्चात केवल प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी की पूजा करें। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान भी अवश्य करें। लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करते रहें। ओम श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में ही करना चाहिए और यह समय संध्याकाल के पश्चात आरंभ होगा। हालांकि इसमें भी स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। स्थिर लग्न में पूजन कार्य करने से मां लक्ष्मी घर में वास करती है। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है।

दीपावली हिंदू धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक है। माना जाता है कि इस दिन प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण रावण का वध कर अयोध्या वापस आए थे। साथ ही इस दिन को बुराई में अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा के साथ साथ श्री गणेश, कुबेर और सरस्वती की पूजा की जाती है। दीपावली के दिन विधि विधान से पूजा करने से माता जल्द ही प्रसन्न होती है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है। इस दिन पूजा तो हम करते है, लेकिन कभी कभी ऐसी गलतियां कर देते हैं कि जिसकी वजह से माता अप्रसन्न हो जाती है। पूजा के समय हमें कुछ पारंपरिक मान्यता का ध्यान रखकर पूजा करनी चाहिए।  


Visitors: 312386
© 2018 Vasundhara Deep News. All rights reserved.