17th May 2018 222

पढिय़े...सिपाही 1 और बैंक 23, बहुत नाइंसाफी


खस्ताहाल पुलिसिंग में लूट डकैती नहीं होगी तो क्या होगा

मैन पावर की भारी किल्लत से जूझ रही है आवास विकास चौकी

राम भरोसे रहती है आवास विकास की डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी

सर्वेश तिवारी, रुद्रपुर

आपने शोले फिल्म तो देखी ही होगी। फिल्म के खलनायक अमजद खान यानि गब्बर का डायलॉग आदमी दो और तुम तीन... बहुत नाइंसाफी। अब सोच रहे होंगे कि हम आपको इस डायलॉग की याद क्यों दिला रहे हैं। क्योंकि आजकल आवास विकास चौकी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। जहां दिन में ड्यूटी के लिए सिर्फ एक सिपाही और एक होमगार्ड होता है और इन पर जिम्मेदारी 23 बैंकों की होती है। इन बैंकों के साथ ही इन दो लोगों पर आवास विकास की डेढ़ा लाख से ज्यादा आबादी की सुरक्षा का जिम्मा भी रहता है। अब ऐसे में राम राज तो कायम होने से रहा। अब राम राज कायम नहीं होगा तो लूट और डकैती तो होंगी ही। 

आपको पता ही होगा कि बीते रोज भरी दोपहर बाइक सवार तीन बदमाशों ने एचडीएफसी बैंक के बाहर एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। दस लाख की लूट में नाकाम होने के बाद लुटेरों ने व्यापारी पर फायर भी झोंका। हालांकि गनीमत रही कि गोली व्यापारी के हाथ में लगी। आइए अब जानते हैं कि आखिर इस वारदात के पीछे वजह क्या थी। 

दअसल, घटना स्थल आवास विकास चौकी क्षेत्र में आता है। घटना स्थल पर एचडीएफसी बैंक हैं। जहां रोजाना व्यापारी वर्ग अपना भारी भरकम कैश जमा करने आता है। एचडीएफसी की ही तरह आवास विकास चौकी क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 23 बड़ी बैंक हैं। जिनकी सुरक्षा का जिम्मा आवास विकास पुलिस का है, लेकिन आवास विकास पुलिस लाचार है। क्योंकि आवास विकास चौकी के पास मौजूद समय में दो एसआई और 9 कांस्टेबिल हैं। इन कांस्टेबिल में से एक की तबीयत खराब है और पिछले तीन माह से दिल्ली में भर्ती है। जबकि एक की ड्यूटी पूर्णागिरी में लगी है। अब बजे हैं सात कांस्टेबिल। इस सात कांस्टेबिल में से छह तो नाइट ड्यूटी में रहते हैं, जो बेहद जरूरी भी है। अब दिन में केवल एक ही कांस्टेबिल बचता है, जो एक होमगार्ड के साथ पूरे इलाके के दौरे पर रहता है। अब आप समझ ही सकते हैं कि एक कांस्टेबिल और एक होमगार्ड एक साथ कहां कहां मौजूद रह सकते हैं। अब ऐसे में अगर लूटपाट और डकैती नहीं पड़ेगी तो क्या होगा। इस पर भी कब जब बैंक के बाद लूट की असफल वारदात हुई तो आवास विकास चौकी के दो एसआई में से एक एसआई दबिश पर गए थे। बजे एक एसआई यानि चौकी प्रभारी होशियार सिंह तो वह भी अकेले क्या करते।

खैर, ये नाइंसाफी वाला हाल केवल आवास विकास चौकी क्षेत्र का ही नहीं है, बल्कि ऐसा कोई भी थाना और चौकी नहीं है जहां पुलिस कर्मियों की संख्या शत प्रतिशत हो। 

पुलिस से बोला, तो चोरी हो जाने देते बाइक

ऐसा नहीं है कि पुलिस अपना काम ईमानदारी से नहीं करती, लेकिन कुछ लोगों को पुलिस की मेहनत भी रास नहीं आती। किस्सा चार दिन पुराना है। आवास विकास चौकी के कुछ सिपाही रात्रि गश्त पर थे। इसी दौरान उनकी निगाह सड़क पर खड़ी बाइक पर पड़ी। जिसका लॉक खुला हुआ था। पड़ताल पर जब कोई बाइक मालिक नहीं मिला तो पुलिस उसे चौकी ले आई। अगले दिन बाइक तलाशता बाइक मालिक चौकी जा पहुंचा और बाइक लाने की वजह पूछी। पुलिस ने गाड़ी का लॉक खुली होने की बात कहते हुए कहा कि अगर बाइक चोरी हो जाती तो क्या। इस पर बाइक मालिक का कहना था कि बाइक चोरी हो जाती तो हो जाने देते, बाइक को लेकर क्यों आए। अब ऐसे लोगों को कौन समझाए, अगर बाइक चोरी हो जाती तो पुलिस के चक्कर काटते ही नजर आते और चिल्लाते कि पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं कर रही। 

एक होमगार्ड और वो भी उधार में मिला है

आवास विकास चौकी के पास दिन में केवल एक ही सिपाही है। इस सिपाही का साथ देने के लिए एक होमगार्ड की व्यवस्था है, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि यह होमगार्ड आवास विकास चौकी से संबद्ध नही है। बल्कि मैन पावर की कमी को देखते हुए होमगार्ड को इधर से उधर किया गया है। यानि ये होमगार्ड भी जुुगाड़ का है और कितने दिन तक यह आवास विकास चौकी में रहेगा इसका भी कोई भरोसा नहीं है। आवास विकास चौकी में मुंशी भी हैं, लेकिन इन्हे फील्ड पर नहीं भेजा जा सकता। अगर ऐसा किया गया तो फिर चौकी में लिखा पढ़ी कौन करेगा। इतना ही नहीं अगर यह फील्ड पर गए तो फिर चौकी में ताला लगाना पड़ेगा। अब सोचिए जो अपराधी दिन में खुलेआम लूट की कोशिश कर सकते हैं वह ताला लगी चौकी से क्या क्या ले जा सकते हैं। 


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