24th June 2018 402

गोपूली का दबदबा बरकरार, रिव्यू 26 लाख के पार


रमेश बाबू की गोपूली सटैके लिगो चोरा पर थिरक रहा उत्तराखंड 

युवाओं के साथ बुजुर्गो को भी भाया कुमाऊंनी गाने का नया अंदाज

जीवन राज, हल्द्वानी। 

सुरों के सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के सुपुत्र रमेश बाबू गोस्वामी अपने पिता के पुराने गानों को एक नये अंदाज में दर्शकों के सामने लाये है। उनके गोपूली गाने ने आजकल खूब धूम मचा रखी है इसका अंदाजा इसी बात लगाया जा सकता है कि इस गाने को यू ट्यूब में अभी तक 26 लाख से ऊपर रिव्यू मिल चुके है। 

स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी द्वारा लिखित यह गाना इससे पहले भी 80 के दशक में खूब धमाल मच चुका है। अब उनके सुपुत्र रमेश बाबू गोस्वामी ने इसे नये अंदाज में गाकर खूब वाहवाही लूटी है। यू ट्यूब पर अपने पिता जी के नाम से चैनल से रमेश बाबू ने इस गाने को लॉच किया है। इस गीत में खास बात यह है कि इसमेंं पुराने कुमाऊंनी शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। जो शब्द आज कुमाऊंनी भाषा से विलुप्त होने की कगार पर है। 80 के दशक में आये इस गाने से पहाड़ से दिल्ली तक धमाल मचाया था। अब पहाड़ की संस्कृति और सुरों को जिंदा रखने के लिए उन्हें संजोने का जिम्मा उनके सुपुत्र रमेश बाबू ने अपने कंधों पर लिया है। 

बता दें कि वर्ष 2006 गायकी के क्षेत्र में कदम रखने वाले रमेश बाबू काफी संघर्ष के बाद एक बड़े लोकगायक के रूप में उभरे है। अभी तक उनके कई गाने सुपर हिट हुए है। अब रमेश बाबू का गोपूली गीत युवाओं का ही नहीं, बुर्जुगों की जुबां पर भी सिर चढ़ कर बोल रहा है। शादी पार्टियों के अलावा बर्थडे पार्टियों में भी युवा और बुजुर्ग इस गाने पर खूब थिरक रहे हैं। उनके गोपूली चायखाना बयाला ले रौ, गोपूली तिहैणी बिलौज ल्याऊ सटैके लिगो चोरा गीत ने आजकल खूब धमाल मचा रखा है। यू ट्यूब पर इस गाने को अभी तक 2,608,880 लाख रिव्यू मिल चुके है।

पलायन रोकना मेरा पहला उद्देश्य : रमेश बाबू

हल्द्वानी। वसुन्धरा दीप से बातचीत में रमेश बाबू गोस्वामी ने बताया कि उनका पहला लक्ष्य उत्तराखंडी संस्कृति को संवारना और पलायन को रोकना है। अपने गानों के माध्यम से वह पलायन रोकने का प्रयास कर रहे है। उन्होंने बताया कि इसलिए वह शहर में न रहकर पहाड़ में ही अपना जीवन व्यापन कर रहे है। जल्द ही उनकी ओ घस्यारी एलबम आ रही है। जिसमें पहाड़ की महिलाओं की पीड़ा पर फोकस किया गया है। इसके बाद उनका युवाओं के लिए एक डीजे सांग भी आयेगा। जिसमें पुराने शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक वह मुबंई के अलावा दुबई, गाजियाबाद, दिल्ली, रानीखेत, द्वाराहाट समेत कई स्थानों में अपनी प्रस्तुति दे चुके है।




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