11th July 2018 77

नहीं रूके तो 200 करोड़ के पार होगी आबादी


बढ़ती जनसंख्या बन रही बेरोजगारी का बड़ा कारण

रजत शर्मा

रुद्रपुर। दिन ब दिन बढ़ रहे जनसंख्या के दवाब को हर वर्ष महसूस करने के लिए विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। हर सेकंड बढ़ रही आबादी के मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचना इस दिन का मुख्य कारण है। विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शासी परिषद द्वारा पहली बार 1989 में हुई जब आबादी का आंकड़ा लगभग पांच बिलियन के आस पास पहुंच गया था। संयुक्त राष्ट्र की गवर्निंग काउंसिल के फैसले के अनुसार वर्ष 1989 में आयोजित एक विकास कार्यक्रम में, विश्व स्तर पर समुदाय की सिफारिश के द्वारा यह तय किया गया कि हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जायेगा। भारत में बेरोजगारी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या है। यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आगामी दस सालों में देश की आबादी दो सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर जायेगी इसलिए जरुरी है कि इस पर सख्त से सख्त कानून बनाया जाए। जनसंख्या नियंत्रण कानून जब चीन, जापान, अमेरिका व अन्य देशों में लागू हो सकता है तो भारत में क्यों नहीं। भारत देश में हिन्दुओं की जनसंख्या का अनुपात घटता जा रहा है जो कि चिंता का विषय है। देश में आजादी के समय हिंदुओं की संख्या कुल जनसंख्या का 9० प्रतिशत थी जो अब घटकर 71 प्रतिशत रह गयी है। भारत जनसंख्या वृद्धि में दुनिया के कई देशों से बहुत आगे है। आजादी के वक्त भारत की आबादी 34.2० करोड़ थी जो आज बढ़कर एक अरब 25 करोड़ से भी ऊपर पहुंच चुकी है। भारत में दुनिया की 15 फीसदी आबादी रहती है और भारत के पास विश्व का 2.4 प्रतिशत भू भाग है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनसंख्या वृद्धि किस तरह एक विकराल समस्या है। भारत हिंदु बाहुल्य होने के कारण ही लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष देश है। यदि देश में ऐसे ही हिंदुओं की जनसंख्या घट गयी तो देश में न तो लोकतंत्र रहेगा और न ही धर्मनिरपेक्षता। इतिहास उदाहरण है कि जब जब किसी देश में सहिष्णु आबादी घटी और असहिष्णु लोगों की संख्या बढ़ी है तब वह देश भी मिस्र, सीरिया, लेबनान, ईरान, ईराक व पाकिस्तान की तरह बर्बाद हो गया है। इसी बढ़ती जनसंख्या के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। विकास में रुकावट पैदा हो रही है। जनसंख्या का इसी तेजी के साथ बढऩा जारी रहा तो एक दिन बहुत गंभीर स्थिति बन जायेगी, जिससे निपटना आसान नहीं होगा। 

विश्व जनसंख्या दिवस, विश्व आबादी से जुड़े मुद्दों और जागरुकता को लेकर मनाया जाता है। यूं तो मानव ने हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। नए नए तकनीकी अविष्कार ने मानव जीवन को बिल्कुल बदल कर रख दिया है, लेकिन इस अंधाधुंध विकास के बीच के कई समस्याएं भी चुनौती के रूप में सामने खड़ी हुई हैं। इनमें एक समस्या है तेजी से बढ़ती जनसंख्या। इसको नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से प्रयास जारी हैं, लेकिन बावजूद इसके जनसंख्या में वृद्धि लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर विकासशील देशों में जनसंख्या विस्फोट गहरी चिंता का विषय है। यहां तक कि हम दो हमारे दो का वाक्य भी सिर्फ बोलने मात्र तक रह गया है। बोलते तो सब हैं कि हम दो हमारे दो परंतु इस पर कोई भी अमल नहीं करता।

उत्तराखंड में हर वर्ष बढ़ रहा जनसंख्या का आंकड़ा

उत्तराखंड में देखा जाये तो जनसंख्या हवा तरह फैल रही है। जो दिन ब दिन विकराल रुप ले रही है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2०13 में उत्तराखंड की कुल आबादी लगभग 1०.14 मिलियन, वर्ष 2०14 में 1०.17 मिलियन, वर्ष 2०15 में 1०.22 मिलियन, वर्ष 2०16 में 1०.28 मिलियन, वर्ष 2०17 में 1०.32 मिलियन रही। गणना के अनुसार वर्ष 2०18 की अनुमानित जनसंख्या लगभग 1०.356 मिलियन के करीब मानी जा रही है। लगातार बढ़ रही जनसंख्या समाज के लिए चिंता का विषय है। आने वाले समय में बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी का बहुत बड़ा कारण बनेगा।


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