14th June 2018 197

पढिय़े... कहा हुआ आस्था की घंटी का करोड़ों का कारोबार


कुमाऊं के मंदिर में हर साल चढ़ाई जाती हैं 10 से 12 करोड़ रुपये की घंटियां

11वीं शताब्दी में चंद राजाओं के दौर से शुरू हुआ था घंटी चढ़ाने का सिलसिला

घंटी की आवाज से वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां होती हंै नष्ट

जीवन राज, हल्द्वानी

देश में कोने कोने की संस्कृति, भाषा और रीति रिवाज भिन्न भिन्न है। ऐसा ही एक रिवाज कुमाऊं में प्रचलित है, देवी देवताओं को घंटी चढ़ाने का। जी हां कुमाऊंनी संस्कृति में देवी देवताओं को घंटी चढ़ाने का रिवाज सदियों पुराना है। जिसे लोग आज भी निभाते चले आ रहे हैं। इसी रिवाज के चलते पूरे कुमाऊं में आस्था की घंटी का कारोबार प्रतिवर्ष 10 से 12 करोड़ के पार जा रहा है।

गौरतलब है कि देवभूमि उत्तराखण्ड के मंदिरों में 11वीं शताब्दी में चंद राजाओं के दौर से ही घंटी चढ़ाई जाती रही है। कुमाऊं में प्रसिद्ध चितई गोलू मन्दिर, घोड़ाखाल मन्दिर, नैना देवी, लक्ष्मी माता मंदिर, गर्जिया देवी, मां पूर्णागिरि धाम, कालीचौड़ माता और शीतला माता मंदिर में घंटी चढ़ाने लोग दूर दूर से आते हैं, पुरानी मान्यताओं के अनुसार लोग वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने, कार्य से सेवानिवृत्त होने या अन्य मनोकामना के पूर्ति के लिए मंदिरों में घंटी चढ़ाते हैं।

महामण्डलेश्वर सोमेश्वरयती जी महाराज ने बताया कि कुमाऊं का सबसे विशालकाय घंटा हल्द्वानी के महालक्ष्मी मंदिर में लगा है जो की 650 किलो का है जिसे सन 2010 में यहां लगाया गया था, इसे देखने के लिए लोग देश विदेश से इस मंदिर में आते है। घंटी हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए लोग घंटी को घर से लेकर मन्दिर तक रखते हैं। बताया कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है। इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है। वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इससे नकारात्मक शक्तियां हटती हैं और नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं। 

वही शहर के व्यापारी राजीव अग्रवाल ने बताया कि वैसे तो घंटी का कारोबार पूरे सालभर चलता है लेकिन गर्मी और सर्दियों की छुट्टी के दौरान इनकी डिमांड और भी बढ़ जाती है, क्योंकि लोग देश विदेश से मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं और घंटी चढ़ाते हैं। अकेले हल्द्वानी बाजार से घंटी का हर साल करीब एक करोड़ का कारोबार हो रहा है जबकि पूरे कुमाऊं से 10 से 12 करोड़ कारोबार होता है। जिससे अंदाजा लगया जा सकता है कि मन्दिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। 

कुमाऊं के मन्दिरों में लोगों द्वारा जो घंटी चढ़ाने का रिवाज है उसके चलते आस्था की घंटी का कारोबार में उछाल आया है। जो हर साल बढ़ते जा रहा है।


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