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कानपुर किडनी कांड में डॉक्टर दंपती को बड़ी राहत, 4 महीने जेल में रहने के बाद मिली जमानत; वकील बोले- ट्रांसप्लांट किया ही नहीं कानपुर। चर्चित किडनी कांड के आरोपित आहूजा अस्पताल के डाक्टर दंपती समेत चार लोगों को जमानत मिल गई है। आहूजा दंपती को हाई कोर्ट से और अन्य दो अस्पताल संचालकों की जिला जज कोर्ट से जमानत मिली है। चारों की जमानतें अलग-अलग तारीखों पर मंजूर हुई हैं।

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कानपुर किडनी कांड में डॉक्टर दंपती को बड़ी राहत, 4 महीने जेल में रहने के बाद मिली जमानत; वकील बोले- ट्रांसप्लांट किया ही नहीं कानपुर। चर्चित किडनी कांड के आरोपित आहूजा अस्पताल के डाक्टर दंपती समेत चार लोगों को जमानत मिल गई है। आहूजा दंपती को हाई कोर्ट से और अन्य दो अस्पताल संचालकों की जिला जज कोर्ट से जमानत मिली है। चारों की जमानतें अलग-अलग तारीखों पर मंजूर हुई हैं।

रावतपुर पुलिस ने 30 मार्च को आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का पर्दाफाश किया था। कल्याणपुर के मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। यहां बिहार के मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को छात्र आयुष कुमार की किडनी लगाई गई थी। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद रिसीवर पारुल तोमर को कल्याणपुर के प्रिया अस्पताल में और डोनर आयुष कुमार को मेडलाइफ हास्पिटल में भर्ती कराया गया था।
पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डा. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी आइएमए उपाध्यक्ष डा. प्रीति आहूजा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, मेडलाइफ के संचालक राम प्रकाश, राजेश कुमार और दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने सभी जेल भेजा था। इसी मामले में आहूजा दंपत्ति की ओर से जिला न्यायालय में जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में अपील की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि जमानत के पक्ष में तर्क दिया गया कि आरोपित दंपती ने किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया और न ही इसमें उनकी कोई भूमिका है। वह दोनों 31 मार्च से जेल में हैं। उनकी कोई क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं है। 27 जून को पुलिस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हाई कोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।

उधर, मेड लाइफ हास्पिटल के संचालक राजेश कुमार और प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह की ओर से भी जिला जज कोर्ट में जमानत की अर्जी दी गई थी। दोनों की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। राजेश कुमार के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि पुलिस प्रपत्रों में केवल राजेश कुमार का उल्लेख है। वह उनके मुवक्किल के लिए नहीं बल्कि उसी नाम के दूसरे आरोपी के लिए है, जिसका नाम विशेष रूप से एफआइआर में दिया गया है।

राजेश का नाम सहअभियुक्त शिवम अग्रवाल और कुलदीप के बयानों के आधार पर संलिप्त किया गया है। पुलिस अभिरक्षा में आरोपित के दिए बयान को कोई महत्व नहीं है। राजेश आहूजा अस्पताल का कर्मचारी नहीं था बल्कि दिल्ली में काम करने वाला ओटी टेक्नीशियन है। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह की ओर से भी जिला न्यायालय में तर्क दिए गए। जमानत अर्जी स्वीकृत हो गई है।


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