पाकिस्तान: तालिबान से सैन्य ताकत ज्यादा, फिर भी अफगानिस्तान में जमीनी हमले से क्यों बच रहा?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में पाकिस्तानी वायु सेना की ओर से अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया। सैन्य ताकत के मामले में पाकिस्तान आगे है, लेकिन वह जमीनी सैन्य अभियान के बजाय हवाई हमलों पर अधिक निर्भर नजर आ रहा है।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के अनुसार, पाकिस्तान सैन्य क्षमता के मामले में अफगानिस्तान से काफी आगे है। पाकिस्तान के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और संगठित वायु सेना है, जबकि तालिबान के पास प्रभावी वायु सेना नहीं है। तालिबान लड़ाके मुख्य रूप से उपलब्ध हथियारों और गुरिल्ला युद्ध की रणनीति पर निर्भर हैं। इसके बावजूद सैन्य ताकत का अंतर जमीनी युद्ध में आसान जीत की गारंटी नहीं देता।
अफगानिस्तान में जमीनी अभियान पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। दुर्गम पहाड़ी इलाके, सीमा पार सक्रिय लड़ाके और गुरिल्ला युद्ध की रणनीति पाकिस्तानी सैनिकों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक चलने वाले अभियान में सैनिकों के नुकसान, आर्थिक खर्च और क्षेत्रीय अस्थिरता का जोखिम भी रहेगा। ऐसे में हवाई हमलों के जरिए दबाव बनाना पाकिस्तान के लिए अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला विकल्प हो सकता है, हालांकि इससे सीमा पर तनाव खत्म होने की गारंटी नहीं है।





