छत्तीसगढ़: शवों के सम्मान में मोहन का अनूठा संकल्प, 10 साल से दिन का भोजन त्यागा
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान सहयोग करने वाले मोहन वाल्मीकि पिछले 10 वर्षों से दिन का भोजन नहीं कर रहे हैं। शवों के प्रति सम्मान और अपने काम से जुड़ी संवेदनाओं के चलते उन्होंने यह संकल्प लिया है। मोहन पूरे दिन केवल चाय पीते हैं और रात करीब 11 बजे एक बार भोजन करते हैं। उन्होंने जीवन में कभी शराब का सेवन भी नहीं किया।
मोहन के पिता भी धमतरी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के काम में सहयोग करते थे। जब वह 10वीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए मोहन ने महज 16 साल की उम्र में पोस्टमार्टम के दौरान शवों के विच्छेदन में सहयोग करना शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में शव और खून देखकर उनके हाथ कांपते थे और कई बार उन्हें उल्टी भी हो जाती थी।
मोहन बताते हैं कि शुरुआत में शवों की तस्वीरें आंखों के सामने घूमने के कारण उन्होंने करीब एक साल तक सब्जी तक नहीं खाई। पोस्टमार्टम के दौरान होने वाली परेशानी के चलते उन्होंने दिन का भोजन छोड़ दिया, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या और संकल्प बन गया। आज 42 वर्ष की उम्र में मोहन हजारों पोस्टमार्टम में सहयोग कर चुके हैं। उनका यह संकल्प शवों के प्रति संवेदनशीलता और अपने काम के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल है।





