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खनन निदेशक राजपाल लेघा को मिलेगा ‘इंडियाज़ ऑनेस्ट इंडिपेंडेंस ऑनर’, उद्योगपति हरीश मुंजाल ने की सराहना

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खनन निदेशक राजपाल लेघा को मिलेगा ‘इंडियाज़ ऑनेस्ट इंडिपेंडेंस ऑनर’, उद्योगपति हरीश मुंजाल ने की सराहना

 

देहरादून।उत्तराखंड में खनन व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। प्रदेश के खनन निदेशक राजपाल लेघा को उनके नेतृत्व में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रतिष्ठित ‘इंडियाज़ ऑनेस्ट इंडिपेंडेंस ऑनर’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।

 

राजपाल लेघा के नेतृत्व में खनन विभाग ने कई अहम सुधारात्मक कदम उठाए हैं। अवैध खनन पर सख्ती, प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे प्रयासों से विभाग की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। इन पहलों के कारण प्रदेश की खनन व्यवस्था पहले से अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनी है।

 

खनन क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों का प्रभाव राज्य की उपलब्धियों में भी दिखाई दिया है। हाल ही में केंद्र सरकार की रैंकिंग में उत्तराखंड को देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है। इसे प्रदेश में खनन व्यवस्था में हुए सुधारों का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।

 

इस अवसर पर प्रदेश के उद्योगपति हरीश मुंजाल ने भी खनन निदेशक राजपाल लेघा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजपाल लेघा द्वारा बनाई गई नीतियाँ प्रदेश में खनन व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। उनके मार्गदर्शन में हुए नीतिगत बदलावों से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ी है।

 

हरीश मुंजाल ने कहा कि इन सुधारों से उद्योग जगत को भी एक व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था मिली है, जिससे खनन से जुड़े कार्य अधिक सुचारु रूप से संचालित हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और सुधार की सोच के साथ किए गए कार्यों का ही परिणाम है कि आज राजपाल लेघा को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है।

 

जानकारों का मानना है कि खनन क्षेत्र में किए जा रहे इन सुधारों से न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था की दिशा में भी उत्तराखंड एक उदाहरण बनकर उभर रहा है।

 


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