नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बजट को छलावा बताया 

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बजट को छलावा बताया

कहा बजट में देश हित को लेकर कोई योजना नहीं

 

देहरादून उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य बजट 2026 को छलावा बताते हुए कहा की बजट भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता

उन्होंने कहा कि “मिशन मोड” अब “चैंलेंज रूट” बन गया है

साथ ही उन्होंने कहा की “रिफॉर्म एक्सप्रेस” शायद ही किसी “रिफॉर्म” जंक्शन पर रुकती है ने ही बजट का कोई

नतीजा है न ही कोई पॉलिसी विजन है उन्होंने कहा बजट में कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है

श्री आर्य ने कहा कि देश के अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या इनकम सिक्योरिटी प्लान का इंतजार कर रहे हैं और असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर से भी आगे निकल गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही SC,ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है।

नेता प्रतिपक्ष आर्य ने कहा कि सरकार को वित्त आयोग की सिफारिशों का और अध्ययन करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे

सरकार राज्य सरकारों को कोई राहत देंगी जो गंभीर वित्तीय संकट में हैं उन्होंने कहा संघवाद इसका शिकार हो गया है।

उन्होंने सरकार को राय देते हुए कहा की अभी क्या गायब है और कहाँ इसकी जरूरत हैः-

1. मैन्युफैक्चरिंग- कोई रिवाइवल रणनीति नहीं 13 प्रतिशत पर अटकी हुई है। “मेक इन इंडिया” कहाँ है?

2. नौकरियाँः- हमारे युवाओं के लिए रोजगार या वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई गंभीर योजना नहीं है पिछली इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं का क्या नतीजा निकला?

3.एक्सपोर्ट/ट्रेड- एक्सपोर्ट में गिरावट, टैरिफ जोखिम, व्यापार घाटा, घटते वैश्विक हिस्से

पर कोई जवाब नहीं। गिरते रुपये के लिए कोई प्लान है?

4. गरीब और मध्यम वर्ग- महंगाई से कोई राहत नहीं, बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है, वेतन स्थिर है। कंज्यूमर डिमांड को फिर से शुरू करने का कोई आइडिया क्यों नहीं है?

5. प्राइवेट इन्वेस्टमेंट- भरोसे का कोई संकेत नहीं – FDI और वेतन में ठहराव को नजरअंदाज किया गया। सिर्फ छोटे-मोटे बदलाव क्यों, कोई स्ट्रक्चरल रिफॉर्म क्यों नहीं?

6. इंफ्रास्ट्रक्चर- वादे दोहराए गए, डिलीवरी गायब – शहर अभी भी रहने लायक नहीं हैं। हमें “स्मार्ट सिटी” या रहने लायक शहर कब मिलेंगे?

7. सोशल सिक्योरिटी- सोशल सिक्योरिटी और कल्याण पर एक भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं हुई। मनरेगा की जगह लेने वाले नए कानून के लिए आवंटन पर एक शब्द भी नहीं है। क्यों?

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह बजट कोई समाधान नहीं देता, यहाँ तक कि पॉलिसी की कमी को छिपाने के लिए नारे भी नहीं है

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