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समिति अध्यक्ष बोले, सीनियर सिटिजन होना गुनाह है क्या?

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समिति अध्यक्ष बोले, सीनियर सिटिजन होना गुनाह है क्या?

काशीपुर। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति अध्यक्ष हरीश कुमार सिंह ने कहा कि भारत में 70 वर्ष की आयु के बाद वरिष्ठ नागरिक चिकित्सा बीमा के लिए पात्र नहीं हैं, उन्हें ईएमआई पर ऋण नहीं मिलता है। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाता है। उन्हें आर्थिक काम के लिए कोई नौकरी नहीं दी जाती है। यहां तक कि उन्हें प्रॉपर्टी बंधक रखने पर भी बैंकों से कर्ज तक नहीं मिलता। इसलिए वे दूसरों पर निर्भर हैं। उन्होंने अपनी युवावस्था में सभी करों का भुगतान किया था। अब सीनियर सिटिजन बनने के बाद भी उन्हें सारे टैक्स चुकाने होंगे। भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई योजना नहीं है। रेलवे पर 50% की छूट भी बंद कर दी गई। दुःख तो इस बात है कि राजनीति में जितने भी वरिष्ठ नागरिक हैं चाहे मंत्री हों या सांसद या फिर विधायक, उन्हें सब कुछ मिलेगा और पेंशन भी लेकिन सीनियर सिटिजन पूरी जिंदगी सरकार को कई तरह के टैक्स देते हैं फिर भी बुढ़ापे में पेंशन नहीं। सोचिए अगर औलाद न संभाल पाए (किसी कारणवश ) तो बुढ़ापे में वे कहां जायेंगे। यह एक भयानक और पीड़ादायक बात है। वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल कौन करेगा? उन्होंने कहा कि कानून बनाने वाले इस सत्य को भूल जाते हैं कि उन्हें भी एक दिन वृद्ध होना है।


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