



देहरादून। उत्तराखंड में भाजपा लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। पिछले दो चुनावों से राज्य की पांचों सीटों पर काबिज भाजपा के सामने अब हैट्रिक बनाकर इतिहास रचने की चुनौती है। इसी हिसाब से पार्टी तैयारियों में जुटी है, लेकिन इसके साथ ही यह प्रश्न भी राजनीतिक गलियारों में तैरने लगा है कि क्या पार्टी इस बार प्रत्याशियों में बदलाव करेगी।
यद्यपि, राज्य में मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल कांग्रेस के मुकाबले भाजपा में टिकट को लेकर मारामारी की स्थिति नहीं है। हरिद्वार, नैनीताल संसदीय सीटों पर कांग्रेस में अधिक दावेदार हैं। ऐसा भाजपा में नजर नहीं आता। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी यहां प्रत्याशियों में बदलाव का जोखिम उठाने से बचेगी।
उत्तराखंड में भाजपा अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रही है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की पांचों सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की। इसके बाद से प्रत्येक चुनाव में भाजपा सफलता के नए आयाम गढ़ती आ रही है। वर्ष 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया तो वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर पांचों सीटों को अपने पास बनाए रखने में वह सफल रही।
इसके अलावा राज्य में नगर निकाय, त्रिस्तरीय पंचायतों व सहकारिता के चुनाव हों या फिर विधानसभा की रिक्त सीटों पर हुए उपचुनाव, सभी में भाजपा ने परचम लहराया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने फिर से दो-तिहाई बहुमत हासिल कर राज्य में हर पांच साल में सत्ताधारी दल बदलने के मिथक को तोड़ा।
पार्टी का लक्ष्य सभी सीटों को लगातार तीसरी बार जीतने का
अब जबकि, अगले वर्ष लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनता की चौखट पर जाना है तो इसके लिए उसने अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पार्टी के महाजनसंपर्क अभियान के कार्यक्रम जिस तरह से तय किए गए हैं, उसे लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के तौर पर देखा जा रहा है। इस परिदृश्य के बीच स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न भी गूंज रहा है कि क्या लोकसभा चुनाव में यहां की सीटों पर पार्टी प्रत्याशी बदलेगी या फिर वर्तमान में प्रतिनिधित्व कर रहे नेताओं पर ही भरोसा जताएगी।
वर्तमान में लोकसभा की हरिद्वार सीट से पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, पौड़ी गढ़वाल से पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और नैनीताल से केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अल्मोड़ा आरक्षित सीट से सांसद अजय टम्टा अपने पिछले कार्यकाल में केंद्र में राज्य मंत्री रहे हैं, जबकि टिहरी सीट पर महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह लगातार सांसद चुनी जा रही है।
पार्टी का लक्ष्य सभी सीटों को लगातार तीसरी बार जीतने का है। माना जा रहा है कि इस परिदृश्य में पार्टी यहां की सीटों पर प्रत्याशी बदलने का जोखिम शायद ही ले। यद्यपि, किसे प्रत्याशी बनाना है किसे नहीं, ये निर्णय लेना पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का काम है। आने वाले दिनों में वह क्या रणनीति अपनाती है, इस पर सभी की नजर है।
भाजपा ऐसी पार्टी है, जो हमेशा इलेक्शन मोड में रहती है। लोकसभा चुनाव सिर पर हैं तो स्वाभाविक रूप से पार्टी तैयारियों में जुट चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में विकास की जो गंगा बह रही है, उससे जनता संतुष्ट है और वह भाजपा को ही फिर से नेतृत्व सौंपेगी। जहां तक टिकट वितरण की बात है तो ये केंद्रीय नेतृत्व का काम है। पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी, हम सभी उसकी जीत के लिए जुटेंगे।
– महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा


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