



दिनेशपुर। बिना अनुमति बोई गई गर्मी की धान पर प्रशासन सख्त कारवाही करते हुए ट्रैक्टर से धान की पौध को जुताई करा कर नष्ट किया। इस दौरान क्षेत्र में किसान और प्रशासन के बीच कार्रवाई की दौरान नोंक झोंंक भी हुई।
उत्तराखंड सरकार द्वारा पानी की कमी को देखते हुए गर्मी की धान की खेती पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी गदरपुर तहसील क्षेत्र में कई किसानों ने बिना अनुमति धान की पौध तैयार कर ली। सरकार ने राजनीतिक दखल के बाद अत्यधिक दलदली जमीन पर सीमित रूप से गर्मी की धान लगाने की अनुमति दी थी, लेकिन इसके लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक की गई थी। मामला सामने आने पर गदरपुर तहसील प्रशासन और संबंधित कृषि विभाग की टीम ने क्षेत्र में निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान कई खेतों में बिना अनुमति तैयार की गई धान की पौध को ट्रैक्टर से जुताई कर नष्ट कर दिया गया। गदरपुर एसडीएम ऋचा सिंह के नेतृत्व में तहसील प्रशासन की इस कार्रवाई से किसानों में नाराजगी देखी गई। रामबाग क्षेत्र में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रशासनिक टीम ग्राम प्रधान विकास समेत अन्य किसानों के खेतों में पहुंची। किसानों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उनकी जमीन दलदली श्रेणी में आती है और उन्हें धान लगाने का अधिकार है। इस दौरान प्रशासन और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। माहौर को देखते हुए प्रशासनिक टीम ने संबंधित किसान से आवश्यक अनुमति दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। किसानों के आग्रह पर प्रशासन ने एक सप्ताह का समय देते हुए स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद टीम बिना जुताई किए वापस लौट गई। तहसील प्रशासन का कहना है कि जल संकट को देखते हुए सरकार के निर्देशों का पालन कराना आवश्यक है। वहीं किसानों का कहना है कि उनकी आजीविका धान की फसल पर निर्भर है, ऐसे में स्पष्ट नीति और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया जरूरी है। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मौके पर तहसीलदार लीना चंद्रा, कृषि अधिकारी अनिल अरोरा, उपनिरीक्षक प्रदीप शर्मा, कांस्टेबल गोविंद आदि मौजूद थे।

