सोनम बांगचुक ने क्योंकि हड़ताल

सोनम बांगचुक ने क्योंकि हड़ताल

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 जुलाई 2026 की आधी रात को 26 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में 28 जून से यह भूख हड़ताल शुरू की थी। [1, 2, 3]
सरकार से मिले लिखित आश्वासन और देश में संभावित हिंसा को टालने के उद्देश्य से उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। [1, 4, 5]
## अनशन टूटने की मुख्य बातें

* नेताओं की मौजूदगी: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की ‘एपेक्स बॉडी’ के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उन्होंने अनशन समाप्त किया। [1]
* सांसदों की अपील: विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया था। [1]
* अस्पताल में थे भर्ती: अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंत्रियों ने उनसे मुलाकात की। [1, 3]

## सरकार के लिखित आश्वासन की 3 बड़ी शर्तें
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि दो दिनों की कड़ी बातचीत के बाद सरकार इन प्रमुख मांगों पर लिखित रूप में सहमत हुई: [5]

1. कोई केस नहीं: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। [5]
2. संसद में चर्चा: देश की परीक्षा प्रणाली को सुधारने और पेपर लीक रोकने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा की जाएगी। [5]
3. पीड़ितों को मुआवजा: नीट पेपर लीक विवाद के तनाव के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को मुआवजा देने पर सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी। [5]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करके सोनम वांगचुक से डॉक्टरों की सलाह मानने और जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

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