छत्तीसगढ़ के बस्तर में 21 साल बाद फिर गूंजी मंदिर की घंटियां

छत्तीसगढ़ के बस्तर में 21 साल बाद फिर गूंजी मंदिर की घंटियां

बस्तर में नक्सल हिंसा के लंबे दौर के बाद अब बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स ने सुकमा से जगरगुंडा, केरलापेंदा होते हुए पूवर्ती तक करीब 13 घंटे की यात्रा की और इलाके की जमीनी स्थिति को करीब से देखा। इस दौरान उन्होंने पुनर्वास केंद्र में मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से बातचीत की और ग्रामीणों से भी क्षेत्र में आए बदलाव को लेकर जानकारी ली।

यात्रा के दौरान केरलापेंदा का श्रीराम मंदिर भी चर्चा का केंद्र रहा, जहां 21 साल बाद दोबारा पूजा और मंदिर की घंटियां गूंजीं। कभी नक्सल हिंसा के डर से प्रभावित रहे इस इलाके में मंदिर का दोबारा खुलना स्थानीय लोगों के लिए बदलाव का अहम संकेत माना जा रहा है। इंफ्लुएंसर्स ने सुरक्षा व्यवस्था और उन इलाकों को भी देखा, जो कभी नक्सली हिंसा के लिए कुख्यात रहे हैं।

यात्रा के अंतिम चरण में टीम पूवर्ती पहुंची, जहां नक्सली कमांडर हिडमा के परिवार से भी संवाद किया गया। इस पूरी यात्रा में पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास, ग्रामीणों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और वर्षों से बंद धार्मिक स्थलों के दोबारा खुलने की तस्वीर सामने आई। बस्तर में बदलते हालात को समझने के लिए यह यात्रा अतीत और वर्तमान के बीच एक महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में सामने आई।

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