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संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य की हरड़ वृक्षों को बचाने की मुहिम आखिरकार रंग लाई

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संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य की हरड़ वृक्षों को बचाने की मुहिम आखिरकार रंग लाई

 

 

काशीपुर। संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य परमानंद डूंगराकोटी की हरड़ वृक्षों को बचाने की मुहिम आखिरकार रंग लाई। आज उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह शहर के सामाजिक संगठन देवभूमि पर्वतीय महासभा के अनुरोध पर मौके पर निरीक्षण को पहुंचे और पेड़ों को बचाने के लिए वहां मौजूद लोगों से सुझाव मांगे तथा प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद की बात कही।

गिरीताल क्षेत्र में हरड़ के तीन वृक्ष हैं। जिनके चारों ओर कूड़े का ढेर लगा हुआ है। यही नहीं पेड़ों को सुखाने के लिए उनकी जड़ों में गड्डे कर चूना डाला गया है। लोगों का कहना है कि इन पेड़ों को सुखाने की तैयारी की जा रही है। हरड़ वृक्षों में आने वाला फल आयुर्वेदिक उपचार के लिए दवा के रूप में प्रयोग होता है। वहीं इस वृक्ष का धार्मिक महत्व भी बताया गया है।

उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंच कर पेड़ों की हालत को देखा। उन्होंने मौके पर सिंचाई विभाग और नगर निगम तथा तहसील के कर्मचारियों को बुलाया। उपजिलाधिकारी ने कहा कि पेड़ों के आसपास कूड़े की सफाई व्यवस्था के आदेश दिये गये हैं। देवभूमि पर्वतीय महासभा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना ने उपजिलाधिकारी को बताया कि इन पेड़ों के चारों ओर एक चबूतरे का निर्माण कराया जायेगा और यहां कूड़ा न डालने की अपील लोगों से की जायेगी। सफाई व्यवस्था के साथ ही पेड़ों की महत्ता दर्शाते हुए एक साइन बोर्ड भी लगाया जायेगा ताकि पेड़ों को संरक्षित रखने हेतु आम जन जागरूक रहें। उपजिलाधिकारी ने कहा कि यह भूमि जिस संस्था के स्वामित्व में आती है उससे मिलकर ही यहां निर्माण करायें। एक पेड़ सिंचाई विभाग की सीमा में है जिसके लिए प्रशासन सहयोग देगा।


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