



उत्तराखंड नेता प्रतिपक्ष आर्य ने नीट की परीक्षा रद्द होने पर सवाल उठाए
कहा बीजेपी के दावों के विपरीत परीक्षाएं हो रही हैं लीक
देहरादून उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने नीट की परीक्षा रद्द होने पर रोष व्यक्त करते हुए बीजेपी सरकारों पर सवाल उठाए है उनका कहना हैं की बीजेपी के दावों के विपरीत लगातार परीक्षाएं लीक हो रही है और युवाओं का भविष्य अधर पर है जिसके चलते बीजेपी सरकारों पर सवाल उठना लाजमी है
प्रेस को जारी बयान में उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी और प्रतिपक्ष नेता यशपाल आर्य ने कहा कि देश में एक बार फिर करोड़ों युवाओं के सपनों के साथ क्रूर मजाक हुआ है उन्होंने कहा पेपर लीक के कारण नीट 2026 की परीक्षा रद्द होना केवल एक प्रशासनिक विफलता ही नहीं, बल्कि 23 लाख छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य पर सीधा प्रहार है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और युवाओं के साथ घोर अन्याय है।
श्री आर्य ने कहा कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला यह साबित करता है कि भाजपा सरकारें युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में पूरी तरह विफल रही हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकार के पास इतनी भी प्रशासनिक क्षमता, इच्छाशक्ति और जवाबदेही नहीं बची है कि एक सामान्य परीक्षा को निष्पक्ष और सुनियोजित ढंग से संपन्न करा सके ? या फिर यह भी सत्ता के संरक्षण में चल रहा कोई ऐसा “संयोग और प्रयोग” है, जिसमें युवाओं की तकलीफों पर राजनीति की मलाई निकाली जा रही है?
उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने सरकार की नीति और नीयत दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हर बार दिखावटी जांच, बड़ी-बड़ी घोषणाएं और खोखले आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है उन्होंने कहा अब सरकार को औपचारिकताओं से बाहर निकलकर आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है और स्वयं से पूछना चाहिए कि “क्या हम देश के युवाओं के साथ न्याय कर रहे हैं?”
श्री आर्य ने कहा कि आज 23 लाख छात्र पुनर्परीक्षा देने को मजबूर है, वे देश के 552 शहरों में स्थित सैकड़ों परीक्षा केंद्रों तक दोबारा यात्रा करेंगे जिससे लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल की अतिरिक्त खपत होगी, करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, छात्रों और उनके अभिभावकों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ेगी। क्या केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री ने इस नुकसान का कोई मूल्यांकन किया है?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश का युवा आज जवाब मांग रहा है। आखिर कब तक उनके सपनों को “पेपर लीक माफिया” और सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ाया जाएगा? युवाओं का धैर्य अब जवाब देने की स्थिति में है और सरकार को इसकी राजनीतिक व नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी

