झारखंड: बेनीसागर से इटखोरी तक मिले शक्ति आराधना के प्राचीन प्रमाण
झारखंड के छोटानागपुर पठारी क्षेत्र में देवी शक्ति की आराधना की प्राचीन परंपरा के अनेक पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं। विभिन्न स्थानों से प्राप्त देवी प्रतिमाएं यहां की धार्मिक मान्यताओं, संस्कृति और इतिहास की झलक प्रस्तुत करती हैं। इन साक्ष्यों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में प्राचीन काल से ही मातृशक्ति की उपासना का विशेष महत्व रहा है।
झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में महिषासुरमर्दिनी, सिंहवाहिनी, चामुंडा, सप्तमातृका और तारा जैसी देवियों की प्रस्तर प्रतिमाएं मिली हैं। बेनीसागर और कांची नदी क्षेत्र को भी शाक्त परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है। इन प्रतिमाओं के अलग-अलग स्वरूप क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद करते हैं।
राजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर और चतरा के इटखोरी में मां भद्रकाली का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शक्ति उपासना की परंपरा से जुड़े प्रमुख केंद्र हैं। वहीं, झारखंड के निकट बंगाल सीमा पर स्थित तारापीठ भी देवी आराधना के लिए प्रसिद्ध है। पुरातात्विक अवशेष झारखंड के प्राचीन इतिहास और शाक्त परंपरा को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।





