बिहार: पंजाब से आया मोर का एक जोड़ा बना 500 का कुनबा, सहरसा में बनेगा राज्य का पहला मयूर विहार
बिहार के सहरसा जिले का आरण गांव अब मोरों के संरक्षण के लिए नई पहचान बनाने जा रहा है। करीब 25-26 साल पहले पंजाब से लाए गए मोर और मोरनी के एक जोड़े से शुरू हुआ सिलसिला आज 500 से अधिक मोरों तक पहुंच गया है। गांव में मोर खुलेआम घरों के आंगन और दरवाजों पर घूमते नजर आते हैं। अब इनके संरक्षण के लिए राज्य का पहला मयूर विहार विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 25-26 साल पहले गांव के कारी झा, अरविंद यादव और अभिनंदन यादव पंजाब में काम करने गए थे। वहां मोरों का झुंड देखकर वे काफी प्रभावित हुए और मोर-मोरनी का एक जोड़ा गांव ले आए। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई और आज गांव में 500 से अधिक मोर मौजूद हैं। ग्रामीण इन पक्षियों को परेशान नहीं करते, लेकिन आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों से इनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
मोरों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग ने मयूर विहार बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए करीब दो एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की जा रही है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने अधिकारियों को उपयुक्त भूमि तलाशने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित मयूर विहार में मोरों के अनुकूल पेड़-पौधे, झाड़ियां और तालाब विकसित किए जाएंगे। उनकी देखरेख के लिए विशेष गार्ड और पशु चिकित्सकों की तैनाती की भी योजना है। सहरसा मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर इस मयूर विहार के विकसित होने से आरण गांव को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है।




