ब्रिटेन: बेटे को तिलक लगाने से रोकने पर स्कूल के खिलाफ पिता ने किया मुकदमा
ब्रिटेन में एक ब्रिटिश-भारतीय हिंदू पिता ने अपने नौ वर्षीय बेटे को तिलक-चांदलो लगाने से रोकने के आरोप में उसके पूर्व प्राइमरी स्कूल के खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। पिता का कहना है कि तिलक-चांदलो उनके स्वामीनारायण हिंदू धर्म का धार्मिक प्रतीक है और इसे लगाने से रोकना धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न है। उन्होंने स्कूल से 25 हजार पाउंड मुआवजे की मांग की है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, नवंबर 2025 में स्कूल स्टाफ ने बच्चे से माथे पर तिलक लगाने के बारे में सवाल किया था और उसे बताया था कि इसकी अनुमति नहीं है। इसके बाद माता-पिता ने स्कूल को पत्र लिखकर कहा कि उनका बेटा चार साल से तिलक लगा रहा है और स्कूल की यूनिफॉर्म नीति में इस पर रोक का कोई प्रावधान नहीं था। पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल ने धार्मिक स्वतंत्रता और समानता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन किया। दिसंबर 2025 में बच्चे को कक्षा प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से हटाया गया और बाद में स्कूल ने धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने वाली नई यूनिफॉर्म नीति लागू कर दी। जनवरी 2026 में माता-पिता ने बच्चे का नाम स्कूल से कटवा लिया।
स्कूल ने पिता के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि तिलक लगाने पर रोक से बच्चे को हिंदू धर्म का पालन करने से नहीं रोका गया। स्कूल ने यह भी दलील दी कि माथे पर रोजाना तिलक लगाना अनिवार्य नहीं है और इसकी अनुमति देने से विद्यार्थियों के बीच आपसी तालमेल प्रभावित होने की आशंका थी। स्कूल स्टाफ ने बच्चे को शरीर के ऐसे हिस्से पर धार्मिक निशान लगाने का सुझाव भी दिया था, जो कपड़ों से ढका रहे, लेकिन माता-पिता ने इसे स्वीकार नहीं किया। मामले ने ब्रिटेन में धार्मिक स्वतंत्रता और स्कूलों की यूनिफॉर्म नीति को लेकर बहस खड़ी कर दी है।




