



आईजी कुमाऊं की अपराध गोष्ठी में सख्त निर्देश, नशे के खिलाफ कार्रवाई और गंभीर अपराधों के खुलासे पर जोर
हल्द्वानी, 18 अगस्त 2026। पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती ने मंगलवार को परिक्षेत्र के जनपद प्रभारियों के साथ मासिक अपराध गोष्ठी कर अपराध एवं कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित पुलिसिंग को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।
गोष्ठी में नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चम्पावत और बागेश्वर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे। 46 बिंदुओं पर जनपदों में चल रही कार्रवाई की समीक्षा की गई।
नवीन आपराधिक कानूनों के तहत 60 और 90 दिन की समयसीमा में आरोप पत्र व अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने, e-Sakshya, Zero FIR और e-Summon के प्रभावी इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। आईजी ने कहा कि नए कानूनों के प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
साइबर अपराध पर भी आईजी ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित पोर्टलों पर लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने और साइबर अपराध के हॉटस्पॉट चिन्हित कर प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
नशे के खिलाफ कार्रवाई में कुमाऊं पुलिस की बड़ी उपलब्धि
01 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक कुमाऊं परिक्षेत्र में NDPS Act के तहत 382 मुकदमे दर्ज कर 519 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इनमें वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े 32 मामलों में 55 आरोपितों की गिरफ्तारी शामिल है। 12 आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
इस अवधि में पुलिस ने 45 किलोग्राम चरस, 7.338 किलोग्राम स्मैक, ब्राउन शुगर और हेरोइन, 1050.700 किलोग्राम गांजा, 4.6 किलोग्राम अफीम, 36.8 किलोग्राम डोडा, 40,257 नशीली गोलियां और कैप्सूल तथा 1,791 नशीले इंजेक्शन बरामद किए। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत 25 करोड़ 66 लाख 71 हजार 407 रुपये बताई गई है।
आईजी ने नशे के नेटवर्क की सप्लाई चेन तक पहुंचने, तस्करों पर कठोर कार्रवाई करने और वित्तीय एवं गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
गंभीर अपराधों के खुलासे में पुलिस का प्रदर्शन
01 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक कुमाऊं परिक्षेत्र में लूट के 94 प्रतिशत, डकैती के 100 प्रतिशत, चोरी के 76 प्रतिशत, हत्या के 96 प्रतिशत और बलात्कार के 100 प्रतिशत मामलों का खुलासा किया गया। वहीं वाहन लूट के 100 प्रतिशत, चैन स्नैचिंग के 79 प्रतिशत, महिला अपहरण के 96 प्रतिशत और दहेज हत्या के 93 प्रतिशत मामलों का भी अनावरण हुआ।
आईजी ने शेष गंभीर मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत पर्यवेक्षण करते हुए जल्द खुलासा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
1,051 गुमशुदा लोगों की हुई बरामदगी
गुमशुदा लोगों की तलाश में भी पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई की। इस अवधि में 12 वर्ष से कम आयु के 10 और 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 210 बालक-बालिकाओं के साथ 299 पुरुषों और 532 महिलाओं समेत कुल 1,051 गुमशुदा लोगों को बरामद किया गया।
आईजी ने खासकर नाबालिगों की गुमशुदगी के मामलों में तत्काल कार्रवाई और तकनीकी संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल के निर्देश दिए।
905 शिकायतों का निस्तारण
परिक्षेत्रीय शिकायत प्रकोष्ठ को 01 जनवरी से 31 जुलाई तक कुल 1,048 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 905 शिकायतों का निस्तारण किया गया। आईजी ने लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा कर शिकायतकर्ताओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं
गोष्ठी में दो माह से अधिक समय से लंबित बलात्कार, पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। आईजी ने निर्देश दिए कि महिला और बच्चों से संबंधित अपराधों की विवेचना में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके अलावा CM Helpline पर 100 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों, CCTNS, e-Beat व्यवस्था, लंबित वाहनों, विभागीय प्रकरणों और गंभीर अपराधों की भी समीक्षा की गई।
पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने सभी जनपद प्रभारियों को अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निस्तारण, नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी पोर्टलों के शत-प्रतिशत इस्तेमाल को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवाएं जनता को त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराना पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

