छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी मामले की जांच में अवैध वसूली का दायरा लौह अयस्क परिवहन तक पहुंचने का दावा किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के अनुसार, जब्त डायरी में तत्कालीन आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने का उल्लेख मिला है। जांच में लौह अयस्क परिवहन पर प्रति टन 100 रुपये की कथित वसूली की बात सामने आई है।

छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी मामले की जांच में अवैध वसूली का दायरा लौह अयस्क परिवहन तक पहुंचने का दावा किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के अनुसार, जब्त डायरी में तत्कालीन आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने का उल्लेख मिला है। जांच में लौह अयस्क परिवहन पर प्रति टन 100 रुपये की कथित वसूली की बात सामने आई है।

उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2023 तक प्रदेश में करीब 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन हुआ। इसी आधार पर कथित लेवी की राशि करीब 1,905 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। हालांकि EOW ने स्पष्ट किया है कि यह फिलहाल गणितीय आकलन है और पूरे उत्पादन पर वसूली के प्रमाण अभी एकत्र नहीं हुए हैं।

EOW के मुताबिक, दिसंबर 2021 में लौह अयस्क के परिवहन पास की व्यवस्था का प्रस्ताव भेजा गया था और जनवरी 2022 के आदेश के बाद सड़क व रेल मार्ग से परिवहन शुरू हुआ। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी दौरान उद्योगपतियों को सूर्यकांत तिवारी या उसके सहयोगियों को 100 रुपये प्रति टन देने के निर्देश दिए गए। मामले में नकद लेनदेन और वसूली व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement