करीब 155 साल पहले बलिया से कलकत्ता और फिर कनाडा पहुंचे एक परिवार की चौथी पीढ़ी ने आखिरकार अपनी जन्मभूमि खोज निकाली। कनाडा के टोरंटो से आए 75 वर्षीय इमतेज और वर्नी अलाय ने पुराने दस्तावेजों की मदद से अपने पूर्वजों के गांव का पता लगाया। वर्ष 1871 के इमिग्रेशन पेपर पर दर्ज जानकारी उनके लिए अपनी जड़ों तक पहुंचने का अहम सुराग बनी।

करीब 155 साल पहले बलिया से कलकत्ता और फिर कनाडा पहुंचे एक परिवार की चौथी पीढ़ी ने आखिरकार अपनी जन्मभूमि खोज निकाली। कनाडा के टोरंटो से आए 75 वर्षीय इमतेज और वर्नी अलाय ने पुराने दस्तावेजों की मदद से अपने पूर्वजों के गांव का पता लगाया। वर्ष 1871 के इमिग्रेशन पेपर पर दर्ज जानकारी उनके लिए अपनी जड़ों तक पहुंचने का अहम सुराग बनी।

लगभग 15 दिन की खोजबीन के बाद दंपती को बलिया की खरसरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला में अपने पूर्वजों का पैतृक ठिकाना मिल गया। लंबे समय से अपने परिवार की जन्मभूमि देखने की इच्छा लेकर आए दंपती के लिए यह पल बेहद भावुक रहा। अपनी पूर्वजों की धरती पर पहुंचकर उनकी खुशी साफ झलक उठी।

हालांकि, दंपती को यहां अपने पूर्वजों का पुराना घर नहीं मिल सका और न ही परिवार का कोई सदस्य वर्तमान में वहां रहता है। इसके बावजूद डेढ़ सदी से अधिक समय बाद गांव तक पहुंचना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। पुराने दस्तावेजों के सहारे की गई यह खोज परिवार के इतिहास और अपनी जड़ों से जुड़ने की एक अनूठी कहानी बन गई।

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