झारखंड: 25 साल में परिवहन की तस्वीर बदली, हवाई सेवाएं बढ़ीं लेकिन रेल परियोजनाओं की रफ्तार धीमी
रांची। झारखंड में पिछले 25 वर्षों के दौरान परिवहन सुविधाओं का विस्तार हुआ है। रांची के साथ देवघर से भी नियमित हवाई सेवाएं शुरू होने से यात्रियों को सुविधा मिली है। सड़क नेटवर्क में भी तेजी से बदलाव आया है और राज्य में फोरलेन से लेकर आठ लेन तक की सड़कें बनी हैं। हालांकि सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
रेलवे के क्षेत्र में बजट में बड़ा इजाफा होने के बावजूद परियोजनाओं की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। वर्ष 2001 में झारखंड का रेल बजट करीब 450 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग आठ हजार करोड़ रुपये हो गया है। राज्य में करीब 75 हजार करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं संचालित हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 57 स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जबकि खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को भी मंजूरी मिली है।
दूसरी ओर, राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा के तहत इलेक्ट्रिक परिवहन का विस्तार किया जा रहा है। चार्जिंग सुविधाओं के लिए एक हजार नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। सरकार का जोर सड़क, रेल, हवाई सेवाओं के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और जलमार्गों के विकास पर भी है।




